बरौनी और कांटी थर्मल पावर प्लांट बंद होते ही रुक जाएगी 330 मेगावाट पावर सप्लाई – इस वजह से किए जा रहे हैं दोनों प्लांट बंद

डेस्क : बरौनी और कांटी के थर्मल पावर प्लांट एनटीपीसी द्वारा चलाए जा रहे थे। बता दें कि एनटीपीसी भारत सरकार की महारत्न कंपनी है, जो सरकार को खूब धन कमा कर देती है। अब यह दोनों थर्मल पावर प्लांट बंद होने जा रहे हैं, बता दें कि थर्मल पावर प्लांट सालाना 330 मेगावाट बिजली उत्पादन करते हैं। ऐसे में यदि यह पूरी यूनिट को रोक दिया जाए तो 330 मेगावाट बिजली का उत्पादन रुक जाएगा। फिलहाल के लिए बताया जा रहा है कि दोनों थर्मल पावर प्लांट बेहद ही ज्यादा पुराने हो चुके हैं और इनमें इस्तेमाल की जा रही तकनीक भी पुरानी हो चुकी है।

इनमें इस्तेमाल की जा रही तकनीक ज्यादा बिजली की खपत करती है। ऐसे में थर्मल पावर प्लांट के जरिए प्रदूषण भी काफी बढ़ गया है, जिसके चलते अब प्लांट को रोकने का ऐलान किया गया है। थर्मल पावर प्लांट बंद करने की जानकारी खुद नीतीश कुमार सरकार द्वारा दी गई है। ऐसे में राजद नेता मनोज कुमार झा ने नीतीश सरकार पर तंज कसा है और कहा है कि बिहार में दो बिजली इकाई बंद होने जा रही है। यह बिजली घर लंबे समय से चल रहे थे, जिनमें अनेकों कर्मचारी और मजदूर काम कर रहे थे। ऐसे में अब उन लोगों का पेट कौन भरेगा? ज्यादा जानकारी के लिए बता दें कि इस थर्मल पावर प्लांट को 581 करोड़ रुपए की लागत से बनाया गया था। इसके बाद 2015 में नीतीश कुमार की सरकार ने थर्मल पावर प्लांट को एनटीपीसी के हवाले कर दिया और अब यह प्लांट बंद होने की कगार पर है।

NTPC और थर्मल पावर प्लांट के अधिकारियों का कहना है कि यह पावर प्लांट ज्यादा पुराना हो गया, जिसकी वजह से यहां पर काफी ज्यादा कोयले की खपत होती है। कोयले की खपत ज्यादा होने से बिजली उपलब्ध मात्रा में नहीं निकल पा रही है। साथ ही प्रदूषण का स्तर बढ़ता जा रहा है। ऐसे में सिर्फ 220 यूनिट बिजली उत्पादित की जा रही है, बता दें कि इस पावर प्लांट को कई बार मरम्मत के लिए दिया जा चुका है। यदि कांटी थर्मल पावर प्लांट की बात करें तो यहां पर 110 मेगावाट बिजली उत्पाद की जाती है। दोनों थर्मल पावर प्लांट को मिलाकर 330 मेगावाट बिजली निकाली जा रही है। ऐसे में यहां से भेजी जा रही बिजली को किस तरीके से पूरा किया जाएगा इसका बिहार सरकार के पास कोई जवाब नहीं है।

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