रोज़ाना आती है 50 हजार कॉल और करते हैं 22 घंटे काम, सोनू सूद को गुस्सा होने का समय नहीं

Sonu sood at airport

डेस्क : कोरोना की पहली लहर जब आई थी, तब बॉलीवुड का एक सितारा लोगों के दिलों में अपनी छाप छोड़ चुका था। जी, हां सही समझा आपने, हम बात कर रहे हैं सोनू सूद की। सोनू सूद ने उन सभी लोगों की जिम्मेदारी अपने कंधों पर उठा ली जो कोरोना से ग्रस्त हैं। ऐसे में सबसे पहले वह मजदूरों को उनके गंतव्य राज्यों तक छोड़ते दिखे थे, जहां पर व उनको बस में बैठा रहे थे और उनको मदद पहुंचा रहे थे।

वही जब दूसरी लहर आई तो वह लोगों के लिए वेंटीलेटर, आईसीयू बेड और ऑक्सीजन कंसंट्रेटर जुगाड़ करते दिख रहे हैं बता दें कि इस बीच उनकी भी तबीयत खराब हो गई थी। हाल ही में दिए गए इंटरव्यू में सोनू सूद का कहना है कि वह आसानी से लोगों की मदद नहीं करते हैं बल्कि उनके काम में कई कठिनाइयां और परेशानियां आती हैं।

सोनू सूद ने बताया कि उनकी मदद करने के लिए प्रशासन भी आगे आया है क्योंकि उनकी टीम एक समय पर इतने लोगों तक नहीं पहुंच सकती है। वह पूरे दिन में 20 घंटे से ज्यादा फोन पर रहते हैं। उन्होंने बताया की मेरे पास दिन की 50,000 से ज्यादा रिक्वेस्ट आती है, लेकिन मेरे पास सिर्फ 10 लोगों की टीम है। मेरी एक टीम रेमडेसिविर इंजेक्शन के लिए है और एक एक्टिव बेड खोजने के लिए है। हम शहर को कुछ इस हिसाब से विभाजित करते हैं कि उसको पूरा कवर हो जाए। उनकी डॉक्टरों से रोजाना बातचीत होती है ताकि जल्द से जल्द मरीजों को मदद मिल सके। सोनू सूद ने कहा है कि उनका एक ही लक्ष्य है कि वह ज्यादा से ज्यादा लोगों के काम आ सके।

सोनू सूद ने बताया कि जब वह किसी की मदद करते हैं तो उनके दिल को सुकून पहुंचता है। वह रात भर जाग कर बिताते हैं, इसके बावजूद उन्हें पूरे दिन पॉजिटिव सोचना होता है। उनके पास गुस्सा करने का बिल्कुल भी समय नहीं है, उन्होंने बताया कि जो लोग गुस्सा करते हैं उनको अपने गुस्से को साइड रखकर लोगों की मदद करनी चाहिए। सबसे ज्यादा मुश्किल उन जगह पर पहुंचने में होती है, जहां पर कोई साधन नहीं होता। ऐसी जगहों पर हमारी टीम का कोई कांटेक्ट भी नहीं है, वहां पर हम खुद गाड़ियां भेजते हैं और लोगों को अस्पताल पहुंचाते हैं।

जब हम लंबे अरसे तक लोगों के लिए साधन जुटाकर प्रयास करते हैं तो हमें लगने लगता है कि बीमार इंसान हमारे परिवार का हिस्सा है। लेकिन, इतनी मेहनत करने के बाद भी जब ईश्वर उन लोगों को अपने पास बुला लेता है तो हमें लगता है कि हमारे परिवार से ही कोई चला गया। सोनू सूद को लोगों ने काफी बार यह कहा है कि हम आपकी मदद में हाथ बढ़ाना चाहते हैं, इससे यह पता चलता है कि आप अगर पैसे वाले हो या गरीब हो। लोगों की मदद करने के लिए दिल से तैयार होना चाहिए, इसलिए सोनू सूद कहते हैं कि समाज के सारे लोग उठे और लोगों की जान बचानी शुरू करें क्योंकि समंदर में कूदना जरूरी है, तैरना तो लहरें खुदा सीखा देंगी।

सोनू सूद ने कहा है कि जितने भी बच्चों के मां-बाप की मृत्यु हो गई है उनकी पढ़ाई का खर्चा सरकार बिना किसी पैसे के उठाए। साथ ही प्राइवेट स्कूलों को भी उनसे पैसे नहीं लेना चाहिए, इससे उनकी शिक्षा अच्छे से हो सकेगी। सोनू सूद ऐसे बच्चों के लिए मुहिम शुरू करने वाले हैं। साथ ही श्मशान घाट में जो पैसे लगते हैं वह भी नहीं लगने चाहिए क्योंकि यह मुसीबत का वक्त है।

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