Bihar BPSC Topper : पहली, दूसरी दफा हुई फेल फिर तीसरे प्रयास में झोंक दिया सब कुछ और बनी डिप्टी कलेक्टर

Asma khatoon BPSC Topper

डेस्क : बिहार की 64वी BPSC परीक्षा में अनेको अभियार्थी सफल हुए, लेकिन आज हम आपको एक ऐसी अभियार्थी की कहानी बता रहे हैं। जिनको जानकार आप हौंसले से भर जाएंगे। अब तक जितने भी अभियार्थी BPSC परीक्षा से डिप्टी कलेक्टर बनें हैं उनमें से सिर्फ एक ही मुस्लिम महिला हैं जिनका नाम आसमा खातून हैं। अस्मा खातून ने अपनी ग्रेजुएशन(बॉटनी हॉनर्स) तक की पढाई पटना से पूरी की है। आस्मां खातून अपने एक यूट्यूब के इंटरव्यू में बताती हैं की वह शुरू से एक एवरेज विद्यार्थी रही हैं।

उन्होंने अपना मैट्रिकुलेशन सेकंड डिवीज़न में पास किया था और फिर ग्रैजुएशन और पोस्ट ग्रेजुएशन में फर्स्ट डिवीज़न लेकर आईं। जब आस्मा खातून की पढाई पूरी हो गई तो उनके कुछ दोस्त तैयारी कर रहे थे, उनको अपने दोस्तों से यह मालूम हुआ की BPSC एक ऐसा प्लेटफार्म है जहाँ जाकर हम आत्म निर्भर बन सकते हैं और हर महिला के लिए आत्म निर्भर बनना बहुत जरूरी है। यहाँ लोगों को वित्तीय स्थिति भी सही हो जाती है और सम्मान के हकदार भी हो जाते हैं। यह सब चीजें ध्यान में रखते हुए उन्होंने तैयारी करना शुरू किया था। आस्मां खातून बताती हैं की उन्होंने यह तैयारी 2016 में शुरू की थी, पहली बार में वह इंटरव्यू क्वालीफाई नहीं कर पाई थी और दूसरी बारी में प्रीलिम्स भी नहीं निकला था।

आस्मा खातून के पिता जी चिकन की दूकान चलाते हैं और वह अपने दो भाई बहिन में सबसे बड़ी है। वह बताती हैं की मेरे माँ बाप के पास काफी कम पैसे होते थे लेकिन उसके बाद भी उन्होंने मुझे पढ़ाया और पढ़ाने में कोई कसर नहीं छोड़ी। आस्मां खातून अपने पूरी दिनचर्या में बड़े ध्यान से हर चीज़ के लिए समय निकालती थी। उनका मानना है की देर तक पढ़ने का कोई फायदा नहीं है यदि आपको कुछ समझ ही नहीं आ रहा है। इसलिए कम पढ़ें लेकिन क्वालिटी स्टडी करें।

उनकी तैयारी में उन्होंने 6 से 12 तक की सभी किताबें पढ़ीं और राज्य सभा चैनल को देखा। उन्होंने बताया की कोचिंग के नोट्स को कई दफे पढ़ना कारगर साबित होता है। जो बच्चे तैयारी कर रहे हैं उनको राजनीती के लिए लक्ष्मीकांत, इकोनॉमिक्स के लिए रमेश सिंह और जियोग्राफी के लिए माजिद हुसैन पढ़ना चाहिए इसके अलावा ईयर बुक और इकनोमिक बजट पढ़ना भी बेहद आवश्यक है। मेंस की परीक्षा के लिए वह बताती हैं की सभी को ज्यादा से ज्यादा आंसर राइटिंग करनी चाहिए बीते सालों में जो सवाल आए और नए टॉपिक पर अभियर्थिओं को नजर बनाए रखनी चाहिए।

अस्मा खातून कहती हैं की वह शुरू से ही बोलने में काफी पीछे रहीं हैं जिसके चलते उन्होंने इंटरव्यू के लिए खूब प्रैक्टिस की दिन रात बोलने का प्रयास किया अब वह महिलाओं को इस परीक्षा के लिए प्रेरित करती हैं। उनका मानना है की जो भी अभियार्थी या महिला पूरे मन के साथ तैयारी करते है वह जरूर सफल होते है। आस्मा खातून के माता पिता का कहना है की उनकी बेटी बहुत मेहनती है जिसका परिणाम आज उसको मिला है।

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