आस्ट्रेलिया में लाखों का पैकेज ठुकराकर बिहारी युवक बन गया महंत, समाज को दिशा देना उद्देश्य

पढ़ाई लिखाई कर हर कोई अच्छे पैकेज पर नौकरी पाना चाहता है। यदि किसी को नौकरी के लिए विदेश जाना पड़े तो यह सुनहरा अवसर शायद ही कोई छोड़ना चाहेगा। लेकिन सुपौल के एक युवक को पढ़ाई के दौरान धार्मिक कार्य में ऐसी रुचि जगी कि उन्होंने अच्छे पैकेज वाली ऑस्ट्रेलिया और वियतनाम की नौकरी को ठुकरा दिया। केवल 27 साल की उम्र में महंत बन गए।

27 साल की उम्र में बने महंत

सुपौल के एक युवक ने 27 साल की उम्र में महंत बनना स्वीकार किया। महंत सत्यानंद सुपौल के मलहद निवासी हैं। महंत सत्यानंद की आठवीं तक की पढ़ाई सुपौल के मशहूर स्कूल आरएसएम से हुई। आगे की पढ़ाई के लिए वे हरिद्वार चले गए। साल 2017 में उन्होंने राजनीतिक शास्त्र से ग्रेजुएशन की डिग्री प्राप्त की। साल 2019 में उन्होंने योग से एमए किया। उन्होंने ऑस्ट्रेलिया और वियतनाम से जब के ऑफर भी आए मगर उन्होंने ठुकरा दिया।

पढ़ाई के दौरान श्रीमहंत महेश्वर दास से हुई मुलाकात

पढ़ाई के दौरान महंत सत्यानंद की मुलाकात श्री पंचायती अखाड़ा बड़ा उदासीन के श्रीमहंत महेश्वर दास से उनकी मुलाकात हुई। उनसे प्रभावित होकर उन्होंने सामाजिक जीवन धारण कर लिया। महज 27 साल की उम्र में वह महंत बन गए।

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