बिहार की इस बेटी ने बढ़ाया मान, छोटे से गाँव से निकलकर विदेश में जीता पुरस्कार

vyang puraskaar

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डेस्क : बिहार की बेटी ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर व्यंग प्रतियोगिता जीती है, यह व्यंग प्रतियोगिता व्यंग लेखन प्रतियोगिता के नाम से आयोजित की गई थी। इस प्रतियोगिता में देश के बाहर के विद्यार्थी मौजूद थे। दूरदराज के विद्यार्थी इस प्रतियोगिता का बेसब्री से इंतजार करते हैं। इस प्रतियोगिता में 5 क्षेत्रों से विद्यार्थी आए थे जो अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, यूरोप, अफ्रीका और एशिया से थे, लेकिन बिहार की बेटी मधु चौरसिया ने इन सब को पछाड़कर प्रथम स्थान हासिल किया।

बता दें कि बिहार की बेटी मधु चौरसिया पोखरिया पीर में अपने पूरे परिवार के साथ रहती थी और परिवार के साथ रहते हुए ही उन्होंने अपनी पढ़ाई पूरी की। अब उनको 21वीं सदी का 251 अंतरराष्ट्रीय श्रेष्ठ व्यंग का पुरस्कार मिला है और उनका नाम बड़े व्यंगकारों की सूची में शामिल हो गया है। उन्होंने भीमराव अंबेडकर यूनिवर्सिटी से परास्नातक और पत्रकारिता में पढ़ाई की है। वह काफी समय से इंग्लैंड में ही रह रही है और अपनी पढ़ाई इंग्लैंड में ही पूरी कर रही हैं। इस व्यंगकार प्रतियोगिता में भारत के 19 राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों ने हिस्सा लिया। जिसमें झारखंड, उत्तराखंड, कर्नाटक, हरियाणा, बिहार, महाराष्ट्र, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, हिमाचल प्रदेश, जम्मू कश्मीर, तमिलनाडु, पंजाब, पश्चिम बंगाल और तेलंगाना के लोग मौजूद थे।

लेकिन सिर्फ मधु चौरसिया ही एक ऐसी महिला थी। जिनका नाम चयनित किया गया बात करें पुरुष व्यंगकारों की तो उसमें विजयानंद विजय, राम बहादुर चौधरी, विनोद कुमार, वीरेंद्र नारायण, डॉक्टर प्रसाद चयनित किए गए। बता दें कि मधु चौरसिया के पति इंग्लैंड की एक टेलीकॉम सेक्टर में काम कर रहे हैं और उनको वही का ग्रीन कार्ड मिला हुआ है। इस कारण वह वहीं रहते हैं, मधु को फिलहाल ग्रीन कार्ड नहीं मिला है। लेकिन उन्हें बेसब्री से इसका इंतजार है उनके पिता जी केंद्रीय विद्यालय में पढ़ाया करते थे। लेकिन, जब उनकी सेवानिवृत्ति हुई तो वह खगड़िया वापस चले गए।

बता दें कि व्यंग्य लेखन एक ऐसी कला होती है जिसके दम पर कवी अपनी पंक्तियों के जरिए देश के हाल से लेकर कई छोटी और बड़ी बातें कह जाता है, जिसका असर लोगों के दिल और दिमाग पर होता है। इसमें उदासीनता भी मौजूद होती है और आलोचना भी मौजूद होती है। ऐसे में इसको यूरोप एवं एशियाई देशों में खूब पसंद किया जाता है। मध्य काल से यह कार्य एक प्रभावशाली कार्य रहा है। व्यंग के जरिए लोगों को समय-समय पर जागरूक किया जाता है, इसके लिए वह व्यंग्य लेखन का प्रयोग करते हैं।

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