अंग्रेजों पर राज करेंगे भारत के लाल ऋषि सुनक? ब्रिटेन के PM बनने की वोटिंग में सबसे आगे

डेस्क : ब्रिटेन के शासन में रहे भारतीयों के मन में काफ़ी लंबे समय तक ब्रिटेन पर हुकूमत करने की इच्छा रही है. जब से भारतीय मूल के पूर्व वित्त मंत्री ऋषि सुनक Rishi Sunak यूके के अगले प्रधानमंत्री बनने की दौड़ में शामिल हुए हैं तब से लंदन पर हर भारतीय की निगाह लगी है । कयास लगाए जा रहे हैं कि कंजरवेटिव पार्टी के सांसद ऋषि सुनक भारतीयों के सपनों को साकार करने जा रहे हैं. हालांकि न तो भारतीय मूल के सुनक और न ही उनके माता-पिता भारत में पैदा हुए थे। उनका नामांकन ब्रिटेन और ख़ास तौर पर ब्रिटिश राजनीति में भारतीयों के जटिल इतिहास को सामने लेकर आता है. पहले भी ब्रिटेन की संसद में कई भारतीय रहे हैं.

ब्रिटिश इतिहास में 2020 में ऋषि सुनक और गृह सचिव प्रीति पटेल “सबसे भारतीय कैबिनेट” का हिस्सा बनें. हालांकि, 1700 के दशक से ब्रिटेन में रहने के बावजूद ब्रिटिश राजनीति में भारतीय मूल के लोगों का यहां तक पहुंचना काफी मुश्किल था। सभी की निगाहें इस समय सुनक और यूके के अगले पीएम बनने की उनकी दौड़ पर हैं. भारतीय प्रवासियों की कई पीढ़ी इस दौड़ के पीछे गुजर गयी है. आज हम एक नज़र डालेंगे अन्य प्रमुख भारतीय मूल के राजनेताओं पर, जिन्होंने भारतीय मूल के लोगों का मार्ग प्रशस्त किया.

सर मंचर्जी मेरवांजी भौनाग्री- दादाभाई नौरोजी के साथ 1900 के दशक की शुरुआत में पारसी मूल के संसद सदस्य और ब्रिटिश कंजरवेटिव पार्टी के राजनेता थे. हालाँकि, भारत में ब्रिटिश शासन का भौनाग्री ने समर्थन किया और होम रूल प्रचारकों का विरोध किया। शापुरजी सकलतवाला- 1909 से एक कम्युनिस्ट कार्यकर्ता और ब्रिटिश राजनीतिज्ञ थे और यूके लेबर पार्टी के लिए ब्रिटिश संसद सदस्य बनने वाले पहले भारतीय मूल के व्यक्ति थे। इसके साथ ही सांसद बनने वाले ग्रेट ब्रिटेन की कम्युनिस्ट पार्टी के कुछ सदस्यों में से भी एक थे.

सत्येंद्र प्रसन्ना सिन्हा- बंगाल के पहले भारतीय महाधिवक्ता, बिहार और उड़ीसा के पहले राज्यपाल, वाइसराय की कार्यकारी परिषद के सदस्य बनने वाले पहले भारतीय और 1919 में ब्रिटिश हाउस ऑफ लॉर्ड्स के सदस्य बनने वाले पहले भारतीय थे. जिन्होंने भारतीय मूल के लोगों का मार्ग प्रशस्त करने में अहम भूमिका निभाई। रहस्य रूडी नारायण- नारायण एक बैरिस्टर होने के साथ ही नागरिक अधिकार अधिवक्ता थे. 1950 के दशक में वे गुयाना से यूके चले गए थे.गरीबों और कमजोर लोगों के खिलाफ पुलिस की हिंसा के इर्द-गिर्द उनके कई मामले घूमते थे.

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