Bihar के चर्चित ‘गर्भाशय कांड’ की जांच अब CBI करेगी, महिला ही नहीं पुरुषों का भी निकाला गया गर्भाशय जानें –

डेस्क : बिहार में आए दिन नए-नए घोटाले का सामने आना काफी सामान्य सी बात है। लेकिन कुछ गंभीर स्तर के घोटाले इन सबके बीच में पीछे ही रह जाते हैं ,जो धीरे-धीरे सामान लोगों की स्मृति से भी खत्म हो जाते हैं। ऐसा ही एक स्वास्थ संबंधी घोटाला बिहार में सात वर्ष पूर्व हुआ था।जिसके उजागर होने पर हंगामा तो खूब बरपा लेकिन धीरे-धीरे सब के ध्यान से खत्म हो गया था। यह था बिहार का गर्भाशय कांड ।बिहार सरकार के स्तर से जांच समिति भी बनाई गई।लेकिन 7 वर्षों में सिर्फ 41% ही घोटाले की जांच हो पाई। राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना के तहत हुए इस गर्भाशय घोटाले को हाईकोर्ट ने सीबीआई के हाथों में सौंपने के लिए हामी भर दी है।

18 अगस्त को हाई कोर्ट देगी फाइनल फैसला : एडवोकेट जनरल ललित किशोर फिलहाल इस पूरे मामले को देख रहे हैं। वेन्ट्रान्स फोरम के राष्ट्रीय महासचिव रिटायर्ड विंग कमांडर डॉक्टर बी एन पी सिंह ने वर्ष 2015 में एक पिटीशन दायर की थी। जिस की संख्या 10954/2015 थी। जिसमे सुनवाई के बाद बिहार सरकार द्वारा जांच करने का आदेश दिया गया था। लेकिन इतने वर्षों में सिर्फ 41% ही इस घोटाले की जांच हो सकी है। ऐसे में वेन्ट्रेन्स फोरम ने पुनः सीबीआई जांच की अपील की जिसे लगभग मंजूरी मिल गई है। इस मामले में 18 अगस्त को फाइनल फैसला दिया जाएगा।

महिलाओ से साथ पुरुषों का भी निकाल दिया गया गर्भाशय : वर्ष 2011 में केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना की शुरुआत की थी।जिसके तहत बीपीएल फैमिली को 30,000 रुपये तक का इलाज किया जाना था और इसके लिए 350 अस्पतालों का नाम सूची में दिया गया था। इन 350 अस्पताल में कई अस्पतालों ने योजना की राशि को घोटाले करने के नियत से बिना जरूरत के भी कई महिलाओं का गर्भाशय बिना वजह ही निकाल दिया। यहां तक कि ना सिर्फ महिलाएं बल्कि पुरुषों का भी गर्भाशय निकालने के बात सामने आई है। कुल 46,690 महिलाओं के गर्भाशय इस योजना के अंतर्गत 45 अस्पताल के 13 डॉक्टर द्वारा निकाले गए थे। जितनी जांच बिहार सरकार के स्तर से हुई उसमें 703 ऐसी महिलाओं के गर्भाशय निकाले गए थे, जिन्हें किसी तरह की सर्जरी की ज़रूरत ही नहीं थी।इसके बाद 85 पुरुषों के गर्भाशय निकाले गए जाने की बात सामने आ रही है। इसमें जमुई से 13 और अलवर से 2 पुरुषों के गर्भाशय निकाले गए ।जो कि अब तक कि शायद सबसे ज्यादा अचंभित करने वाली बात हो।

इतना वक़्त बीतने के बाद भी अब तक सिर्फ 41% ही इस घोटाले की जांच की जा सकती है। वह भी कितनी सच्चाई और ईमानदारी से भी इस संबंध में कुछ कह पाना मुश्किल है। हालांकि अब हाईकोर्ट,पटना ने सीबीआई के हाथ में जांच सौंपने की बात कही है। संभवतः अब घोटाले की सच्चाई जल्द ही सामने आ जाने की उम्मीद की जा सकती है।

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