सावन के हर सोमवारी 108KM दौड़कर चढ़ाती हैं जल, 70 साल की ये है कृष्णा बंम..

डेस्क : श्रावणी मेले में बाबा बैद्यनाथ धाम में भक्तों का तांता लग जाता है। सुल्तानगंज से देवघर तक बोल-बम का नारा गूंजने लगा है। आज हम आपको बताने जा रहे हैं एक महिला कृष्णा बम के बारे में, जिनके 1982 से जलाभिषेक का सिलसिला शुरू हुआ और वो 2019 तक बिना ब्रेक के जारी रहा। लेकिन बीते 2 साल से कोरोना के कारण वो बाबा के दरबार नहीं पहुंच पाई। कृष्णा हर साल हर सावन के हर सोमवार को सुल्तानगंज से जल उठाकर देवघर बाबा मंदिर में चढ़ाती हैं।कृष्णा बम के नाम 13 घंटे में 108 किलोमीटर दौड़कर बाबा को जल चढ़ाने का रिकॉर्ड है।

मुजफ्फरपुर की रहने वाली 70 साल की कृष्णा ने बताया कि साल 1982 में वह वैशाली जिले के भगवानपुर के सरकारी स्कूल में शिक्षिका के पद पर तैनात थीं। उन्हें अचानक से बाबा बैद्यनाथ की भक्ति की प्रेरणा मिली। बाबा से संकल्प लिया कि जब तक शरीर साथ देगा तब तक वह डाक कांवर यात्रा से बाबा बैद्यनाथ को हर सावन के सोमवार जलाभिषेक करती रहेंगी।

कृष्णा बम ने कहा कि जब 1982 में जब उन्होंने यह संकल्प लिया था कि दौड़कर 24 घंटे के अंदर बाबा बैद्यनाथ को उत्तर वाहिनी गंगा का जल सुल्तानगंज से लेकर जाकर चढ़ाएंगी, तब उस समय रास्ता काफी खराब था। लोगों को पहाड़ों और पथरीले रास्तों के बीच बदमाश लूट लेते थे। संकल्प के अनुसार, बिना कदम रुके ही बाबा को जलाभिषेक करना होता है। कुछ दूरी तक घोड़े पर पुलिस लगी रहती थी, लेकिन बाबा की भक्ति में उन्हें कभी डर नहीं लगा।

जब मां कृष्णा बम सुल्तानगंज से जल लेकर बाबा बैद्यनाथ की तरफ बढ़ती हैं तब उनका पांव छूने के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ लग जाती है। ऐसे में प्रशासन को पुलिस फोर्स की व्यवस्था करनी पड़ती है। मां कृष्णा बम को श्रद्धालु शक्ति मानते हैं और इसीलिए उनके पैर छूकर आशीर्वाद लेने को परेशान रहते हैं। भीड़ को लेकर अब झारखंड और बिहार सरकार उन्हें फोर्स की सुविधा देती है।

वर्ष 2018 में कृष्ण बम मुजफ्फरपुर के शेरपुर मिडिल स्कूल से रिटायर हुई हैं। भले ही सरकार ने उम्र के हिसाब से उन्हें रिटायर कर दिया, लेकिन बाबा की भक्ति का जज्बा उनके अंदर ऐसा रहा कि इसके बाद भी वह वर्ष 2019 तक डाक बम बनकर बाबा को जलाभिषेक करती रही हैं। मां कृष्णा बम का कहना है कि अभी वह ओंकारेश्वर से जल लेकर लगभग 112 किलो मीटर पैदल कावड़ यात्रा कर उज्जैन महाकाल महादेव को जलाभिषेक करेंगी। सावन के पहले सोमवार को जलाभिषेक के बाद वह वह लौटकर बिहार आएंगी और फिर देवघर का प्लान करेंगी।

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