बिहार : सीतामढ़ी में पूर्व सरपंच की दबंगई – पहले अपने पिता की पिटाई, बचाने गए नाबालिग भतीजे को जान से मारने की धमकी..

डेस्क : सुशासन बाबू के सरकार में इन दिनों गुंडागर्दी कुछ ज्यादा ही बढ़ रही है। आए दिन अलग-अलग क्षेत्रों से दबंगई के मामला प्रकाश में आते ही रहते हैं। कुछ इसी प्रकार का ताजा मामला सीतामढ़ी जिले के बठनाहा प्रखंड के नरहा पंचायत के सिरसिया गांव से आया है। जहां पूर्व सरपंच या यूं कहें कि एक छोटे – मोटे नेता के रूप में छुपा हुआ गुंडा अमरेंद्र सिंह ने 07-08-2022 को अपने बेटे सिंकू सिंह के साथ मिलकर अपने बुर्जुग और बीमार पिता रामसकल सिंह की पीटाई की। साथ ही मौके पर बचाने गए अमरेंद्र सिंह के छोटे भाई सतीश सिंह की पत्नी और नाबालिग बेटे शिबू शांतनु को भी मारने की कोशिश की। घटना का विडियो बनाने के दौरान मोबाइल फोन छीन कर नाबालिग शिबू शांतनु के अभद्र शब्दों का प्रयोग करते हुए कहा कि सबको जान से मार देंगे।

दरअसल, मामला जमीनी विवाद से शुरू हुआ और अब इतना बढ़ गया कि जान – माल पर बन आई है। अमरेंद्र सिंह अपने दोनों बेटों विक्की सिंह और सिंकू सिंह के साथ मिलकर अपने छोटे भाई को डरा धमकाकर पूरे परिवार को मार देने की धमकी दे रहे हैं। साथ ही अपने ताकत का इस्तेमाल करते हुए कहा कि जो ताकतवर होगा प्रॉपर्टी भी उसकी ही होगी। इसके अलावा हमेशा ही अपनी पहचान होने और सभी प्रशासन और नेताओं के अपनी मुट्ठी में होने को लेकर धमकी देते आ रहे हैं।

सतीश सिंह अपने बड़े भाई के डर के कारण गांव छोड़ चुके हैं और अब हाल यह है कि गांव आने जाने पर भी उनके परिवार के साथ खाने पीने तक की ज्यादती की जाती है। ना ही उन्हें अलग खाना बनाने दिया जाता है। पेशे से किसान सतीश सिंह और उनकी पत्नी का कहना है कि आय हमारी आय अधिक नहीं होने के कारण अनाज का सहारा गांव के खेतों से थोड़ा बहुत हो जाता था, लेकिन अब हमें वह भी नहीं दे रहे हैं और मांग करने पर रातों रात परिवार के पांच सदस्यों को मौत की नींद सुला देने की धमकी दे रहे हैं। काफ़ी समय से यह सब चल रहा है लेकिन इसकी शिकायत कहीं भी करने पर भी डराया – धमकाया जाता रहा है। लेकिन अब मामला काफ़ी संगीन हो गया है और जान माल पर बन आई है। सतीश सिंह की मांग है कि ज़िला प्रशासन उनके बुर्जुग पिता समेत उनके पूरे परिवार को सुरक्षा प्रदान करें।

बता दें कि बुर्जुग जब जान बचाकर वहां से अपने छोटे बेटे के सीतामढ़ी स्थित घर पर आने की कोशिश कर रहे थे, तब उन्हें मोटरसाइकिल से घसीटते हुए कमरे में बंद कर दिया गया और नाबालिग और उसकी मां को गांव से भगा दिया गया। विवाद के दौरान पंचायत के मुखिया संजय यादव भी वहां मौजूद रहे और बुजुर्ग और पीड़ित महिला के साथ हो रहे अत्याचार का मूक दर्शक बनकर तमाशा देखते रहे।

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