रोज 6 देसी मुर्गे, 10 लीटर दूध और 100 रोटी खाने वाला ये है Gama Pehlwan, कभी किसी से नहीं हारा..

डेस्क : भारत की सरजमीं से कई गिरामी पहलवान निकले हैं जिन्होंने विश्व भर में अपना परचम लहराया हैं। उन्ही में से एक रहे या यूं कहें कि उन सबसे श्रेष्ठ रहे गामा पहलवान जिनकी आज 144 वी जयंती भी हैं। गामा पहलवान ने आज तक कोई भी कुश्ती अखाड़े में नही हारी हैं जिसकी वजह से उन्हें ‘रुस्तमे हिन्द’ की उपाधि भी दी गयी हैं। अपने जीवन के 52 साल इन्होंने अखाड़े को समर्पित किये और उनका आखिरी समय बेहद तंगी में गुजरा।

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6 मुर्गे,10 लीटर दूध,100 रोटियां होती थी डाइट में शामिल : अगर गामा पहलवान की डाइट की बात करें तो लोग उन्हें खाते देख दातों दल उंगलीया दबा लेते थे। दरअसल, गामा पहलवान की डाइट ही ऐसी थी, जिसे पचाना आम इंसान के बस से बाहर है। बताया जाता है कि गामा पहलवान एक दिन में 6 देसी मुर्गे, 10 लीटर दूध, आधा किलो घी, बादाम का शरबत और 100 चपातियां खा जाते थे।

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10 साल की उम्र में शुरू की थी पहलवानी : गामा पहलवान का जन्म 22 मई सन 1878 को पंजाब के अमृतसर में हुआ था। गामा के पिता मुहम्मद अजीज बख्श भी एक देशी पहलवान थे। गामा के बचपन का नाम गुलाम मुहम्मद था। गामा ने महज 10 साल की उम्र से ही पहलवानी शुरू कर दी थी। भारत-पाकिस्तान बंटवारे के समय ही गामा पहलवान अपने पूरे परिवार के साथ लाहौर चले गए थे। गामा पहलवान ने कुश्ती की शुरुआती बारीकियां मशहूर पहलवान माधो सिंह से सीखीं थी इसके बाद उन्हें दतिया के महाराजा भवानी सिंह ने पहलवानी करने की सारी सुविधाएं दी, जिससे उनकी पहलवानी निखरती चली गई। गामा अपने 52 साल के करियर में कभी कोई मुकाबला नहीं हारे थे।

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ब्रूस ली थे गामा के फैन : गामा पहलवान के लोकप्रियता का अंदाज़ा इसी बात से लग जाता हैं कि ब्रूस ली भी इनके प्रशंसक थे। ली ने बैठक लगाना गामा से ही सीखा था वो आर्टिकल के जरिये गामा की गतिविधियों पर नजर रखते थे।

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