बिहार : 6 साल में नहीं बन पाया अगुवानी गंगा ब्रिज – खर्च हुई 859.37 करोड़ से ज्यादा की राशि..

डेस्क : बिहार के भागलपुर जिले में गंगा नदी पर बन रहे दूसरा सबसे बड़ा पुल सिर्फ एक भद्दा मजाक बनकर रह गया है. गंगा पुल निर्माण कार्य में तेजी लाने का दबाव ठेका एजेंसी पर डालने के बजाय पुल निर्माण निगम उसे बार-बार मोहलत दिये जा रहा है. स्थिति यह है कि 5वी बार में भी ठेका एजेंसी को मिली डेडलाइन भी अब फेल हो चुकी है और पुल निर्माण निगम ने अब 30 मार्च 2023(संभावित) तक निर्माण करने की समय दे दी है. इस मसले पर शनिवार को निर्देश भी जारी हो गया।

डेडलाइन को बढ़ाकर 30 मार्च 2023 कर दिया है : गंगा पुल बना कर तैयार करने की संभावित 5 वी डेडलाइन 30 दिसंबर तक थी. इस डेडलाइन पर पुल बना कर तैयार करने की उम्मीद तो खुद पुल निर्माण निगम को नहीं थी. दरअसल, अक्टूबर तक गंगा ऊफान पर रहेगी. बाढ़ की स्थिति भी बनी रहेगी. इस दौरान पुल का काम करा पाना बेहद मुश्किल होगा. गंगा जलस्तर में कमी आने के बाद से ही इस पुल का काम कराया जा सकता है, तब ठेका एजेंसी के पास दो महीना ही शेष बचेगा. इस तरह से 5 वे डेडलाइन पर पुल बनाकर तैयार कर लेने की उम्मीद नहीं है और डेडलाइन बढ़ाकर 30 मार्च 2023 कर दिया गया है.

डेडलाइन अब 30 दिसंबर निर्धारित थी : इधर, गंगा पुल बनकर तैयार करने की मोहलत पर मोहलत देने से पुल निर्माण निगम की कार्यशैली पर भी सवाल खड़ा करता है. दरअसल, पुल निर्माण का कार्य प्रगति भी बेहद धीमी है. इस कारण ठेका एजेंसी डेडलाइन पर गंगा पुल नहीं बन पा रहा है. साढ़े 6 साल में फेल होने वाला यह 5 वी डेडलाइन है. एक नवंबर, 2019 के बाद से ही ठेका एजेंसी को पुल बनाने के लिए मोहलत लगातार दी जा रही है. पांचवी संभावित डेडलाइन 30 दिसंबर तक ही निर्धारित थी.

पुल गिरने के बाद से काम कम बहानेबाजी ज्यादा : आपको बता दें कि उत्तर व दक्षिण बिहार को जोड़नेवाले इस पुल की पाया संख्या 4, 5, 6 के दोनों तरफ के 36 स्लैब अप्रैल में ही ध्वस्त हो गये थे. इसके बाद से गंगा पुल का निर्माण को लेकर काम कम व बहानेबाजी ज्यादा होती दिख रही है. इस वजह से डेडलाइन में बार बार बदलाव जा रहा है. महज 4 महीने में 2 बार डेडलाइन को बदला गया है.

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