Bihar में मुखिया-सरपंच की मदद से स्‍वास्‍थ्‍य विभाग चलाएगा बड़ा अभियान, जानें – पूरा प्लान..

डेस्क : टीबी की बीमारी एक वक्‍त खतरनाक और लाइलाज बीमारी मानी जाती थी। अब इसका इलाज भी आसानी से उपलब्ध है। खास बात यह है कि सरकारी अस्‍पतालों में इस बीमारी का इलाज पूरी तरह फ़्री में होता है और दवा भी मुफ्त में ही दी जाती है। इस बीमारी के पूरी तरह खत्म के लिए बिहार सरकार का स्‍वास्‍थ्‍य विभाग अब प्रदेश भर में एक बड़ा अभियान शुरू करने जा रहा है। इस स्वास्थ्य अभियान में मुखिया और सरपंच सहित समाज के अलग-अलग तबकों की भी मदद ली जाएगी। राज्‍य में अभी तक लगभग सवा लाख मरीजों की पहचान की गई है।

नियमित दवा लेने से ठीक हो जाती हैं टीबी की बीमारी: टीबी की बीमारी अब लाइलाज नही रही हालांकि, इसके लिए एक नियमित सावधानी बरतनी बहुत जरूरी है। टीबी की दवाएं नियमित तौर पर तब तक लेनी होती है, जब तक के लिए डाक्‍टर ने बोला है। अगर इस अवधि में एक दिन भी टीबी का मरीज दवा नही लेता है, तो स्‍थ‍िति बिगड़ भी सकती है। ऐसी हालत में उपचार कराना कठिन हो जाता है। टीबी की दवा अनियमित होने पर मरीज मल्टी ड्रग रजिस्टेंट (MDR) और एक्सटेंसिव ड्रग रेजिस्टेंट स्टेज की अवस्‍था में चले जाते हैं। ऐसी हालत में सामान्‍य दवा भी काम करना बंद कर देती है। इसे MDR टीबी कहते है।

हालांकि अब ऐसे मरीजों का इलाज भी संभव हो पाया है। टीबी की बीमारी आम तौर पर कमजोर और कुपोषित लोगों को ही अपना शिकार बनाती है। यह रोग एक बैक्‍टीरिया के कारण फैलता है। MDR और XDR टीबी के लिए दवा अब करीब 11 महीने तक ही खानी होती है। इसके पहले इस बीमारी के लिए दो साल तक लगातार दवा का सेवन करना पड़ता था।

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