हाईप्रोफाइल मर्डर केस रूपेश सिंह हत्याकांड की कहानी, कहीं ये तो नहीं है गुत्थी,पटना पुलिस के सामने ये सब हैं एंगल

Rupesh Case

बिहार :(संतोष ) इंडिगो एयरलाइंस स्टेशन हेड रुपेश सिंह की हत्या के 11 दिन बाद भी पटना पुलिस का हाथ खाली ही है और जिस तरीके से पटना पुलिस जिद्द पर अड़ी हुई है ऐसे में पटना के एसएसपी और आईजी का किसी भी क्षण तबादला हो जाये तो कोई बड़ी बात नहीं होगी ।

पटना पुलिस फिलहाल चार बिन्दु पर जांच कर रही है लेकिन अभी तक कही से भी कोई ऐसा सुराग नहीं मिला है जिससे पटना पुलिस हत्या की गुत्थी सुलझा सके । पहला एयरपोर्ट के टैक्सी स्टैंड से जुड़ा है हलाकि रुपेश का टैक्सी स्टैंड वालो से जिस तरह से विवाद बढ़ गया था ऐसे में पटना पुलिस के पास इतना साक्ष्य तो जरुर है कि टैक्सी स्टैंड से जुड़े ठेकेदार को जेल भेज कर मामला के इति श्री कर दे ।

टैक्सी स्टैंड को लेकर आया एंगल क्यों कि टैक्सी स्टैंड वालो से रुपेश की कई बार विवाद हो चुकी है एयर होस्टेस के गाड़ी पार्किग को लेकर कई बार विवाद हुआ है ।आख़िरी बार घटना से कोई 15 दिन पहले फ्लाइट इंजीनियर के साथ स्टैंड वालो का गाड़ी पार्किग को लेकर काफी विवाद हुआ था और इस विवाद के कारण फ्लाइट विलम्ब से उड़ा था और इसको लेकर स्टैंड वालो से रुपेश की जमकर बहस हुई थी और एक दूसरे को देख लेने की धमकी तक दिया था। इस घटना को लेकर रुपेश पटना एयरपोर्ट के हेड को स्टैंड का टेंडर रद्द करने को लेकर आधिकारिक तौर पर पत्र लिखा था।

रुपेश सिंह इंडिगो का स्टेशन हेड ही नहीं था पटना एयरपोर्ट से उड़न भरने वाले तमाम प्लेन का फ्लाइट कैसे रेगुलेट हो इसका भी हेड था। ये ज़िम्मेदारी नागर विमानन मंत्रालय कि और से दिया गया था इसलिए रुपेश का कोई भी पत्र या आदेश पूरे एयरपोर्ट परिसर के लिए महत्व रखता था औऱ इस पत्र के आलोक में स्टैंड संचालक से एयरपोर्ट अथॉरिटी ने जबाब भी मांगा था और रुपेश कि जो हैसियत थी उसमें स्टैंड का ठेका रद्द होना तय था। इतना ही नहीं स्टैंड संचालक और रुपेश सिंह के बीच विवाद हुआ था उसका दर्जनों गवाह है और पटना पुलिस चाहे तो इस आधार पर इस केस को निपटा सकती है।

लेकिन एसएसपी उपेंद्र शर्मा इसको लेकर अभी तक तैयार नहीं है क्यों कि उपेंद्र शर्मा कंक्रीट साक्ष्य चाह रहे हैं और इसके लिए वैज्ञानिक अनुसंधान पर बहुत ही गहराई से काम हो रहा है मोबाइल लोकेसन के आधार पर कुछ साक्ष्य भी मिला है लेकिन वो पर्याप्त नहीं है। दूसरा थ्योरी ठेका दिलाने और अय्याशी को लेकर चल रहा है- ये सही है कि तीन विभाग पर इसकी पकड़ थी ये दिख रहा है ,उर्जा विभाग ,जल संशाधन विभाग और पीएचडी विभाग में इनके प्रयास से कई बड़े टेंडर का अंदर टेबल डील हुआ है और इस डील की वजह से बिहार के कई बड़े ठेकेदार प्रभावित हुए हैं ।

ठेकेदारी से जुड़े मामलों का एंगल इसमें भी कोई संदेह नहीं है लेकिन ये लाँबी इतना बड़ा है कि बिना ठोस सबूत के पुलिस हाथ डालने से बच रही है क्यों कि इस खेल में सरकार के कई दुलारे पदाधिकारी शामिल हैं फिर भी पटना पुलिस इस एंगल पर भी बहुत ही गंभीरता से जांच कर रही है ।वही बात अगर अय्याशी कि करे तो इसका लेबल इतना बड़ा है कि उस और पटना पुलिस नजर भी उठा नहीं सकती है ।

पुराने माफिया से अदावत का भी एंगल तीसरी थ्योरी है पटना एयरपोर्ट से ही जुड़े एक पुराने माफिया को लेकर है जिसका रुपेश से पहले पटना एयरपोर्ट पर तूती बोलती थी इस पर इंडिगो के ही एक अधिकारी को धमकी देने का मामला भी दर्ज है जिस घटना में राज्य के आईएस अधिकारी की नौकरी दाव पर लग गयी थी, क्यों कि इस घटना में जिस आर्म्स का इस्तेमाल किया गया था उस आर्म्स का लाइसेंस डीएम रहते हुआ उक्त आईएस अधिकारी ने दिया था।

इस माफिया का भी पहुंच रुपेश कि ही तरह हाई प्रोफाइल है सत्ता के गलियारे में ये भी रुपेश से कही से भी कमजोर नहीं और यही वजह है कि पटना पुलिस इसको लेकर भी फूँक फूँक कर कदम बढ़ा रही है सूरत से इसी के एक करीबी को पुलिस उठा कर लायी है फिर भी जब तक पुलिस के पास इसके खिलाफ पुख्ता सबूत हाथ नहीं लगेगा तब तक उसके गिरेवान पर हाथ डालने से पुलिस परहेज करेगी।

खासमखास दोस्त को कहीं सबकुछ पता नहीं , ये चौथा एंगल चौथी थ्योरी एक बिल्डर से जुड़ा है जो रुपेश का खास मित्र रहा है गोवा भी दोनों का परिवार साथ ही गया था रुपेश सिंह जिस एपार्टमेंन्ट में रहता था वो एपार्टमेंन्ट भी इसी बिल्डर का है दोनों के बीच बहुत गहरी दोस्ती रही है गोवा साथ जाने का टिकट था लेकिन अंतिम समय में बिल्डर रुक गया था हलाकि उसका परिवार साथ ही गया था और ये फिर पीछे से गोवा गया था। जितना गहरा रिश्ता है इन दोनों के बीच रहा है ऐसे में पुलिस का मानना है कि इसे रुपेश की हत्या की वजह जरुर पता होगा क्यों कि रुपेश के कई ऐसे वाटसेप मैसेज पुलिस को हाथ लगा है जिससे ये साफ संकेत मिल रहा है कि रुपेश को अनहोनी का अंदेशा था।

अभी तक यही चार एंगल निकल कर सामने आया है इसमें तीन एंगल हाईप्रोफाइल लोगों से जुड़ा है जिस पर हाथ डालने से पहले पटना पुलिस को हजार बार सोचना पड़ेगा हलाकि पुलिस मुख्यालय और सरकार पटना पुलिस पर लगातार दबाव बना रही है कि फिलहाल मामला शांत करने के लिए स्टैंड वाले मामले में गिरफ्तारी दिखा कर मामले को ठंडे वस्ते में डाल दिया जाये।

लेकिन इसको लेकर पटना पुलिस तैयार नहीं है ऐसे में दो तीन दिनों के अंदर मामले का खुलासा नहीं हुआ तो फिर एसएसपी औऱ आईजी की विदाई तय है क्यों कि आईजी भी बिना ठोस सबूत के जेल भेजने को तैयार नहीं है। देखिए आगे आगे होता है क्या लेकिन पटना पुलिस दबाव के बावजूद जिस तरीके से काम कर रही है वो क़ाबिले तारीफ जरुर है ।

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