बिहार में कोरोना की बढ़ती रफ़्तार को देखते हुए नितीश सरकार ने लिए अहम फैसले

डेस्क : लॉकडाउन की दूसरी लहर ने एक बार फिर से भारत के कई राज्यों को परेशान कर दिया है। उत्तर भारत के साथ साथ दक्षिण भारत के इलाके भी कोरोना की चपेट में आ गए हैं। संक्रमण इतना ज्यादा बढ़ गया है की स्कूल और कॉलेज बंद करने की नौबत आ गई है। फिलहाल 11 अप्रैल तक सारे शैक्षणिक संस्थानों को बंद करने का फैसला लिया गया है। कोरोना के मामलों को देखते हुए बिहार के मुख्य मंत्री ने आपातकालीन बैठक बुलाई है। बिहार के मुख्य सचिव अरुण कुमार के साथ आपदा प्रबंधन सचिव प्रत्यय अमृत के साथ शिक्षा विभाग मंत्री मुख्य सचिव संजय कुमार द्वारा स्कूल बंद करने का फैसला लिया गया है।

जितने भी स्कूल और कॉलेज हैं उनको नई गाइडलाइन के तहत बंद किया गया है। जितने भी समारोह हैं उनमें शादी और श्राद्ध में लोगों की संख्या को घटा दिया गया है। दिन पर दिन आंकड़े बढ़ते जा रहे हैं, हाल ही में 700 के करीब पॉजिटिव मामले आए हैं। जो बैठक क्राइसिस मैनेजमेंट ग्रुप द्वारा की गई है उसमें 7 बड़े फैसले लिए गए हैं। इससे बच्चों की पढाई पर फिर से असर पड़ सकता है। कोरोना की बढ़ती रफ़्तार को रोकने के लिए टीम ने अलग-अलग फैसले लिए गए हैं। बिहार गृह विभाग के मुताबिक़ धार्मिक स्थल, कार्य स्थल, शॉपिंग मॉल और होटल में कोविड-19 का सख्त तरीकों से पालन किया जाएगा।

जहाँ पर सबसे ज्यादा भीड़ होती है, जैसे जलपान गृह, फूड कोर्ट, बस स्टैंड,सब्जी मंडी और रेलवे स्टेशन पर लोगों की अनियमित भीड़ को रोकने के लिए पुलिस बल भी तैयार किए गए हैं। स्कूल कॉलेज को 11 अप्रैल तक बंद कर दिया गया है। अगर किसी सार्वजनिक स्थलों पर बड़े कार्यक्रम होते हैं तो उन पर 30 अप्रैल तक रोक लगाई जाएगी। श्राद्ध में 50 लोग और विवाह में 250 लोग सम्मिलित होने की बात कही गई है। सरकारी दफ्तरों में उन लोगों के प्रवेश की मनाही रहेगी जो लोग दफ्तर से बाहर के होंगे, आम जान मानस को दफ्तर में जाने की इजाज़त नहीं होगी। इस व्यवस्था को 30 अप्रैल तक चलाया जाएगा। पब्लिक ट्रांसपोर्ट में आने-जाने के लिए 50% से अधिक लोगों की मनाही रहेगी। यह व्यवस्था 15 अप्रैल तक के लिए की गई है। कोरोना से बचने के लिए रक्षात्मक उपाय भी किए गए हैं जिसमें मास्क और सामाजिक दूरी बनाए रखना अनिवार्य रहेगा।

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