जब 22 साल बाद जोगी के रूप में घर लौटा बेटा, मांगी भिक्षा..फिर आगे जो हुआ

UP News: आज जो अनोखा किस्सा हम आपको बताने वाले हैं वह उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के अमेठी के बहादुरपुर क्षेत्र के खरौली गांव का है। बता दें कि यहां पर भिक्षा मांगने एक जोगी आया। इस जोगी का घर उसी गांव में था। भिक्षा मांगते हुए वह जोगी अपने घर पहुंचा। दरअसल भिक्षा मांगने आया जोगी इसी गांव का था।

22 साल पहले यह वह लापता हो गया था। साल 2002 में लापता हुए बेटे को मां-बाप ने पहचान लिया। घर में खुशी की लहर दौड़ गई। मगर भिक्षा मांग कर उनका बेटा वापस चला गया। बेटे को वापस घर लाने के लिए पिता 3 लाख 60 हजार रुपए का इंतजाम कर रहे हैं। जो कोई भी इस घटना के बारे में जानता है वह हैरान रह जाता है।

साल 2002 में लापता हो गया था अरुण

रतिपाल सिंह (Ratipal Singh) का पुत्र अरुण कुमार (Arun Kumar) सिंह 11 साल की उम्र में अपने पिता के साथ दिल्ली गया था। दिल्ली में ही अरुण साल 2002 में अचानक से लापता हो गया था। अरुण (Arun) को बहुत ढूंढा गया लेकिन कुछ समय के बाद परिवार वालों ने संतोष कर लिया। 22 साल बीत गए।

22 साल के बाद दोबारा अरुण अपने गांव आया। 22 साल बाद अरुण का वेशभूषा पूरी तरह से बदल गया था। वह जोगी के रूप में आया था। मगर माता-पिता ने उसे पहचान लिया। परिवार वाले उसे अपने साथ रहने के लिए कहने लगे। मगर अरुण नहीं माना। वह गांव में भिक्षा मांगता रहा। अरुण ने बताया कि वह गोरखपुर के किसी मठ में रहता है। जहां पर घर वापसी के लिए कुछ शर्ते हैं।

घर वापसी के लिए देने होंगे 3 लाख रूपए

अरुण का पूरा परिवार उसे वापस पाना चाहता है। अरुण के पिता का कहना है कि 22 सालों में जब भी उसकी याद आई वह रोकर चुप हो जाते थे। क्योंकि कोई पता ठिकाना नहीं था जहां उसको खोजते। मगर अब सब जानने के बाद वह अपने बेटे को वापस पाना चाहते हैं।

रतिपाल सिंह (Ratipal Singh) बताया कि अपने बेटे को वापस पाने के लिए उन्होंने गोरखपुर मठ (Gorakhpur Math) में संपर्क किया और अपने बच्चे को पाने के लिए काफी मिन्नतें की। वे लोग मान गए मगर उनकी शर्त यह थी की मठ में भंडारा करना होगा। जिसमें करीब 3 लाख 60 हजार रूपए का खर्च आएगा। इस रकम को देने के बाद बेटे की घर वापसी होगी। अब वे जैसे तैसे यह रकम जुटा रहे हैं।

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