देवघर ट्राली हादसा : लगा था मर जायेगे, कंठ सूखने पर कई लोगों ने पी लिया पेशाब, श्रद्धालु ने बताया भयावह मंजर

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डेस्क : झारखंड के देवघर मे rope way घटना काफ़ी डरा देने वाला है. त्रिकूट पर्वत रोपवे हादसे के बाद आखिरकार रेस्क्यू ऑपरेशन खत्म हो गया है. ऑपरेशन 45 घंटे तक चला और सेना ने 46 लोगों की जान बचाई। हालांकि दुर्भाग्य से इस हादसे में चार लोगों की मौत भी हो गई। सेना, वायुसेना,ITBP, NDRF के संयुक्त अभियान में सोमवार को 33 लोगों को बचाया गया। वहीं, आज 13 लोगों को निकाला गया।

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लेकिन आज एक महिला पहाड़ी से नीचे गिर गई और उसकी मौत हो गई।ऐसे में एक परिवार जो इस हादसे से बच कर वापस आया है उन्होंने इस हादसे की कहानी मीडिया से कही है.त्रिकूट पर्वत के रोपवे पर फंसे काजीचक के एक ही परिवार के छह लोग वहां का हाल बताया.ऐसा लग रहा था कि अब हम मर जाएगे लेकिन सेना ने हमें बचा लिया। देवघर से लौटने के बाद बातचीत में श्रद्धालु ने बताया कि गर्मी के कारण हालत बहुत खराब थी.प्यास से उसका गला सूख रहा था। कई लोगों ने पेशाब पीकर ही अपनी जान बचाई।

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रोपवे ट्रॉली पर सांस रोककर बाबा बासुकीनाथ को याद करते हुए बैठे हुए थे : मुझे लगा कि अब हम मर जाएंगे लेकिन 24 घंटे तक लगातार सांस रोककर बाबा बासुकीनाथ को याद करते हुए चित्रकूट पर्वत के बीच में रोप-वे ट्रॉली पर हम बैठे हुए थे। कभी दूसरी ट्रॉलियों में फंसे लोग बचाओ-बचाओ चिल्ला रहे थे तो कोई पानी-पानी कहकर रो रहा था. हमने अंधेरे और उजाले में 24 घंटे तक यह भयावह मंजर देखा।

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बासुकीनाथ धाम से पूजा-अर्चना कर घूमने निकले थे : परिवार के एक प्रमुख सदस्य नीरज ने बताया कि रामनवमी पर पूजा करने के लिए बाबा बासुकीनाथ धाम गए थे। उनके साथ बहन अनन्या, मामी कौशल्या देवी, बहन अन्नू राज, दोस्त मुन्ना, और डिंपल उर्फ ​​राकेश थे। जब हम पूजा कर लौट रहे थे तो मन में यह ख्याल आया कि चित्रकूट पहाड़ घूम लेते हैं। फिर हमलोग दोपहर दो बजे रवाना हुए और दोपहर के ढाई बजे पहुंचे तब टिकट काउंटर बंद मिला। फिर 2:50 बजे काउंटर खुला जिसके बाद हमने 160 रुपये प्रति टिकट लिया। हम सभी दो ट्रॉलियों में सवार हो गए। एक में चार लोग और एक में दो लोग थे.

डर के मारे रात को सो नहीं पाया : पहाड़ पर पहुंचते ही ट्रॉली हिलने लगी और ऐसा लग रहा था कि फेंक दिया जाएगा। हिलते रहने के तीन मिनट बाद अचानक ट्राली रुक गई। और फिर उसके बाद तो भूखे-प्यासे 24 घंटे ट्रॉली पर ही गुजारे। शाम से रात हो गई, रात में डर के मारे सो नहीं सका। गर्मी से भी हालत खराब थी और प्यास से गला भी सुख रहा था। लेकिन कोई विकल्प न होने पर हम सिर्फ बाबा बासुकीनाथ को याद कर रहे थे.कई लोगों ने तो अपना ही यूरिन पीकर अपनी जान बचाई।

दूसरे दिन का सूर्योदय भी ट्रॉली से ही देखा। लगातार हम मदद का इंतजार कर रहे हैं। इसी बीच कोई चिल्लाता बचाओ, कोई कहता पानी दो,कोई कहता मर जाएंगे.वायुसेना का हेलीकॉप्टर दोपहर करीब साढ़े तीन बजे पहुंचा और सभी को बचाने में जुट गया. उसके बाद फिर सांस मे जान आई। जवानों ने सभी को गंभीरता से बचाया.इसके बावजूद एक युवक फिसल कर गिर गया और उसकी मौत हो गई। उससे पहले हमारे सामने सात लोग मारे गए थे। इन बातों की जानकारी मिलने पर सभी की हालत खराब हो गई।

इसके बाद सबको देवघर के सदर अस्पताल लाया गया और उनकी मानसिक और शारीरिक स्थिति की जांच की गई. काजीचक से परिवार के अन्य सदस्य भी मौके पर पहुंचे थे। अब सभी सुरक्षित हैं। उन लोगों ने कहा कि वे Rope way पर कभी नहीं जाएंगे। बाबा बासुकीनाथ की कृपा ने सभी को बचा लिया। कौशल्या देवी ने कहा कि मै कभी नही जाऊंगी,जीवन से खेलकर मनोरंजन करना उचित नहीं है।