2020 में सब बदल गया यहाँ तक कि चुनावी धुन भी,का बा’ vs ‘ सब बा’

2020 में सब बदल गया यहाँ तक कि चुनावी धुन भी, बा' vs ' सब बा'

डेस्क : बिहार विधानसभा चुनाव 2020 में लौट आया गीतों से प्रचार का दौर। तीन- चार दशक पहले उम्मीदवार और उनके समर्थन में चौक-चौराहों-चौपालों पर गीत गूंजते रहते थे। बीच के दौर में गायकों की मांग कम हुई और उनकी जगह ले ली सिनेमा के अभिनेताओं ने। शत्रुघ्न सिन्हा के डायलॉग ‘खामोश’ और हेमा मालिनी की ‘चल धन्नो’ से वोटरों का एक तरह से मनोरंजन होने लगा। पर इस बार कोरोना काल की चुनौतियों के बीच हो रहे बिहार चुनाव ने आवाज-सुरों के गुमनाम बिहारी सितारों को उभरने का मौका दिया है। सभी दलों में एक तरह से गीतों से प्रचार की होड़ सी है। इस होड़ ने कई अनाम-गुमनाम गीत लेखकों व गायकों को स्टार के रूप में चमकने का मौका दे दिया है।

नेहा राठौड़ के ‘का बा’ के जादू ने गीतों से प्रचार के लिए सियासी दलों को प्रेरित किया। सत्तापक्ष ने भी ‘बिहार में का बा’ के जवाब में कई गीत तैयार कराए। विपक्ष ने भी नेहा के गीत को लपक लिया। अब तरह-तरह के चुनावी गीतों की पैरोडी बिहार की विभिन्न भाषाओं में टोलों, मुहल्लों में गूंज रहे हैं। ‘बिहार में का बा’ से रातों-रात सुपर स्टार हुई नेहा के भोजपूरी गीत का जवाब मैथिली भाषा में चर्चित युवा गायिक मैथिली ठाकुर ने दिया- ‘बिहार में, मिथिला में की नई अछि।’ जदयू ने अपने सोशल प्लेटफार्म पर इस गीत को टैग कर दिया। फिर चर्चित लोकगायक सत्येन्द्र संगीत के गीत को मुख्यमंत्री ने लॉन्च किया-‘तरक्की दिखती है’। भाजपा ने ‘का बा’ के जवाब में गीत उतारा-रुक, बताव तानी का बा। राजद के गीत के बोल हैं ‘बिहार तेजस्वी भव:’।

गीतों से चुनाव प्रचार के इस दौर ने वैसे गायकों को भी मंच दिया, जिनकी आवाज तो दमदार थी, लेकिन उन्हें मौका नहीं मिला था। ऐसे गायकों के गीत के सहारे मैदान में उतरे दल भी पूछे जाने पर उनके नाम नहीं बता पा रहे। अपने गीत ‘मोदी जी की लहर-लहर, आवे दूर-दूर से नजर-नजर’ के साथ, भोजपुरी स्टार दिनेश लाल यादव निरहुआ जैसे नाम भी इस दौड़ में हैं।

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