जानिए कैसे एक आम हरियाणा शिक्षक की बेटी बिहार में बनी डीएसपी, पढ़ें सफलता की पूरी कहानी

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डेस्क : बिहार राज्य को इस वक्त ऐसे अधिकारियों की जरूरत है जो गरीब, मजलूम और जरूरतमंद लोगों की इंसाफ दिला सके। ऐसे में कोई युवा ही है जो यह सभी कार्य एक साथ कर सकता है। बता दें कि इस बार एक युवा आईपीएस ऑफिसर बिहार पुलिस में उपाधीक्षक बनकर पहुंची है। इस आईपीएस ऑफिसर का नाम है अभिजीत कौर। अभिजीत कौर की उम्र 26 वर्ष है, उन्होंने पुलिस सेवा परीक्षा को पहले ही प्रयास में सफल कर लिया है।

अभिजीत से पुछा गया की उनको कैसा लग रहा है तो उन्होंने बताया की यह मेरा बचपन का सपना था और आज यह सपना पूरा हो गया है जिसके चलते मैं बहुत खुश हूं। अभिजीत कौर की 1400 में से 130 रैंक आई है। वह देश की पहली महिला पुलिस ऑफिसर किरण बेदी से प्रेरित हैं। वह बताती हैं कि जब उन्होंने छोटे में किरण बेदी की किताब पढ़ी तो वह काफी रोमांचित हो उठी थीं।

बचपन से ही उनको दादा-दादी, माता-पिता और शिक्षकों का सहयोग मिलता रहा है जिसके चलते पढ़ाई में वह हमेशा अव्वल रही। अभिजीत कुमार के दादाजी भी पुलिस अधीक्षक थे, जो दिल्ली में तैनात थे। जब अभिजीत कौर से इंटरव्यू में फिजिकल फिटनेस से सवाल पूछा गया तो उन्होंने ऐसे जवाब दिए जिससे इंटरव्यू लेने वाले बेहद प्रसन्न हो गए। एक पुलिस वाले की क्वालिटी अभिजीत कौर में बचपन से ही थी।

अभिजीत कौर की नानी कहती हैं कि वह बचपन से ही बहुत होनहार लड़की थी। वह पूरी लगन के साथ पढ़ाई करती थी। अभिजीत कौर की मां का कहना है कि उन्हें अपनी बेटी के लिए बहुत खुशी है और वह भारत की सभी होनहार बेटियों पर गर्व करती हैं। अभिजीत कौर ने प्रारंभिक पढ़ाई करने के दौरान ही अपना पूरा ध्यान केंद्रित करके पढाई की है वह पांचवी कक्षा से ही लगातार हेड गर्ल बनती रही है। वह बचपन से काफी अनुशासित छात्रा है। अभिजीत कौर की मां ने आगे कहा कि वह जब बिहार की धरती पर जाएगी तो पुलिस सेवा में नए आयाम स्थापित करेगी।

अभिजीत कौर के पिता जी एक शिक्षक है और शिक्षक होने के नाते वह सभी प्रकार की प्रतियोगी परीक्षाओं पर नजर बनाए रखते थे, जिसके चलते अभिजीत कौर को काफी मदद मिलती थी। औसतन अभिजीत कौर 6 से 7 घंटे पढ़ाई करती थी। कभी-कभी तो वह पढ़ते-पढ़ते इतना मगन हो जाती थी कि वह 12 घंटे पढ़ाई कर लेती थी। ऐसे में उन्होंने एक संस्था से कोचिंग भी ली थी।

आखरी में अभिजीत कौर ने बताया कि युवाओं को कभी भी मेहनत करना नहीं छोड़ना चाहिए और चुनौतियों से नहीं घबराना चाहिए, क्योंकि मुझे भी अपनी तैयारी में काफी कठिनाई हुई। लेकिन मेहनत और प्रयास का नतीजा हमेशा अच्छा निकलता है। अब मैं बिहार में रहकर पूरा प्रयास करूंगी की ईमानदारी से पुलिस प्रशासन की छवि को बेहतर बना सकूं और जितना हो सके उतना योगदान करके जनता के काम आऊं।

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