पति-बेटों को खोने के बाद भी नहीं हारी हिम्‍मत, अब लड़ेगी राष्ट्रपति चुनाव, जानें – कौन हैं द्रौपदी मुर्मू..

डेस्क : ओडिशा में सिंचाई और बिजली विभाग में एक कनिष्ठ सहायक से लेकर भाजपा के नेतृत्व वाली और राष्ट्रपति पद की उम्मीदवार नामित होने तक का सफर आदिवासी नेता द्रौपदी मुर्मू (Draupadi Murmu) के लिए ये मुश्किल सफर रहा है। झारखंड की पूर्व राज्यपाल और आदिवासी नेता द्रौपदी मुर्मू राष्ट्रपति चुनाव में भारतीय जनता पार्टी की उम्मीदवार होंगी। पार्टी अध्यक्ष जगत प्रकाश नड्डा ने उनकी उम्मीदवारी की घोषणा की।

कौन हैं द्रोपदी मुर्मू : द्रौपदी मुर्मू का जन्म 1997 में संथाल समुदाय में हुआ था, उनके गांव का नाम रायरंगपुर नगर था। उन्होंने अपना राजनीतिक सफर पंचायत चुनाव में एक पार्षद के रूप में शुरू किया और फिर वो वर्ष 2000 में ओडिशा सरकार में मंत्री बनीं। तकरीबन 5 साल बाद यानी वर्ष 2015 में द्रौपदी को झारखंड के राज्यपाल के रूप में चुना गया। वह रायरंगपुर से दो बार विधायक भी रहीं। उनके नाम झारखंड की पहली महिला राज्यपाल बनने का भी रिकॉर्ड है।

बेहद पिछड़े और दूरदराज के जिले की रहने वाली मुर्मू ने अपने जीवन मे गरीबी और अन्य समस्याओं से लड़ते हुए हुए भुवनेश्वर के रमादेवी महिला कॉलेज से कला में स्नातक किया और ओडिशा सरकार के सिंचाई और बिजली विभाग में एक कनिष्ठ सहायक के रूप में अपना करियर शुरू किया था। मुर्मू को 2007 में ओडिशा सर्वश्रेष्ठ विधायक के लिए नीलकंठ पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। उनके पास ओडिशा सरकार में परिवहन, वाणिज्य, मत्स्य पालन और पशुपालन जैसे मंत्रालयों को संभालने का अनुभव भी है। उन्हें 2013 में भाजपा राष्ट्रीय कार्यकारिणी (एसटी मोर्चा) के सदस्य के रूप में भी नामित किया गया था। मुर्मू का विवाह श्याम चरण मुर्मू से हुआ और दंपती के तीन संतान… दो बेटे और एक बेटी हुईं। उन्होंने अपने पति और दोनो बेटों को खो दिया है।

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