मिर्जापुर के ‘कालीन भईया’ Pankaj Tripathi पहुंचे अपने गांव – देसी अंदाज में सड़क किनारे पौधे लगाकर दिया ये सन्देश..

डेस्क : बॉलीबुड के सबसे बेहतरीन अभिनेताओं की श्रेणी में शुमार पंकज त्रिपाठी आजकल मुम्बई की चकाचौंध भरी दुनिया से बाहर बिहार के अपने गांव पहुँच गए हैं. पंकज त्रिपाठी अपने देसी अंदाज के लिए जाने जाते हैं और गांव आगमन ओर उनका यह ठेठ देसी अंदाज खुलकर बाहर आता हैं. अपने गांव पहुँच कर पंकज त्रिपाठी ने पौधरोपण करके समाज को पर्यावरण के लिए एक सन्देश भी दिया जिससे लोग पर्यावरण के लिए जागरूक हो।

पैतृक गांव बेलसड पहुँचे पंकज त्रिपाठी : मिली जानकारी के अनुसार बालीवुड में अपने अभिनय का लोहा मनवाने वाले अभिनेता पंकज त्रिपाठी पिछले दो दिनों से अपने पैतृक गांव बेलसड़ में हैं। वे अपने माता-पिता व परिवार के अन्य सदस्यों के साथ मिलकर वहां रहते हैं। बेलसड पहुंचने के बाद भीषण गर्मी व अल्प वर्षा होते देखकर उन्होंने गांव में पौधारोपण का एक अभियान चलाने की बात कही। जिसके बाद उन्होंने 400 पौधे बेलसड़ गांव की तरफ जाने वाली सड़क के किनारे लगाए। उन्होंने बताया कि बीते रविवार को पौधारोपण की शुरूआत करते हुए 51 पौधे लगाए गए हैं। शेष बचे पौधे भी बारी-बारी से लगाने का काम किया जाएगा। बालीवुड अभिनेता पंकज त्रिपाठी ने बातचीत में बताया कि मेरे गांव से बगल के गांव तक की सड़क किनारे एक भी पेड़ नहीं था। इसलिए आज से पौधारोपण अभियान की शुरूआत कर दी गई है। इन पौधों में फलदार व छायादार पौधे भी शामिल हैं।

लिट्टी चोखा का भी लिया मजा : इस अभियान के दौरान पं. बनारस तिवारी व हेमवती देवी फाउंडेशन के सौजन्य से पौधारापेण करने की पहल की गई। फाउंडेशन की ओर से बनपाल भी रखे गए हैं जो 5 वर्ष तक पौधों की पूरी देखभाल और रक्षा करने का कार्य करेंगे। इस फाउंडेशन के ट्रस्टी विजेंद्र नाथ तिवारी ने यह बताया कि हमारे पूर्वज जो हमें दे गए थे, आज वो विनिष्ट हो रहा है। हमारी अगली पीढ़ी स्वस्थ्य व निरोग रहे, इसलिए पेड़ पौधों का होना बहुत जरूरी है। इस पहले भी अभिनेता पंकज त्रिपाठी अपने गांव आए थे. इस दौरान उन्होंने गांव वालों के सात मिलकर लिट्टी भी लगाई थी। लिट्टी लगाने वाली तस्वीर भी इंटरनेट मीडिया पर खूब वायरल हुई थी। उस वक्त उन्होंने कहा था कि मैं गांव से जुड़ा हूं, इसलिए अपने लोगों के बीच आकर अच्छा लगता है। पंकज त्रिपाठी अक्सर मुंबई से गोपालगंज अपने गांव बेलसड आते रहते हैं।

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