गर्भवती महिला को खाट पर लेटा कर गाँव वाले ले गए अस्पताल, लेकिन समय पर इलाज न मिलने से जच्चा-बच्चा ने तोड़ा दम

Jharkhand

डेस्क : भारत में अभी भी कई ऐसे राज्य हैं जहां पर बीहड़ इलाके मौजूद है और इन इलाकों में लोगों की उपस्थिति बहुत ही कम है। ऐसे में लोगों की अनुपस्थिति के चलते वहां पर सड़कें भी नहीं है और सड़क ना होने की वजह से कई लोगों को लंबा सफर तय करके आम सुविधाओं के लिए एक जगह से दूसरी जगह जाना पड़ता है। अक्सर ही यह देखा गया है कि जब लोगों को किसी काम की जरूरत पड़ती है तो वह इतने खराब रास्ते का इस्तेमाल नहीं करते और जरूरतमंद चीजों से वंचित रह जाते हैं।

ऐसे इलाकों में आदिवासी जाति के लोग रहते हैं। लेकिन, सरकार इन आदिवासी जाति के लोगों के लिए ठोस कार्य नहीं कर पा रही है। अनेकों योजनाएं इस वक्त भारत में चल रही है, खासकर सड़क निर्माण पर खूब जोर दिया जा रहा है। लेकिन, फिर भी ऐसी दुर्घटनाएं आए दिन सामने आ ही जाते हैं जिनको सुनते ही दिल पसीज जाता है। यह खबर झारखंड के गिरिडीह गांव की है। जहां पर एक महिला जो गर्भवती थी उसको गांव वाले खटिया पर बैठा कर अस्पताल ले जा रहे थे। लेकिन रास्ता इतना खराब है कि वहां पर सड़क नहीं है और एक आम सुविधा ना होने के कारण महिला ने रास्ते में ही बच्चे को जन्म दिया लेकिन जच्चा और बच्चा की जान चली गई।

महिला का नाम सूरजी मरांडी है जिसको प्रसव पीड़ा उठने के बाद परिजन, घर पर पड़ी हुई खाट का इस्तेमाल कर उसको लादकर स्वास्थ्य केंद्र ले जा रहे थे। उन्होंने अपनी यात्रा शाम के 5:00 बजे शुरू की थी। जैसे ही यह खबर प्रशासन तक पहुंची तो प्रशासन तुरंत हरकत में आ गया और उसने पूरे मामले की छानबीन करना शुरू किया। बता दें कि जब स्वास्थ्य केंद्र पर महिला को पहुंचा दिया गया तो वहां पर कोई डॉक्टर ही नहीं मिला। ऐसे में स्वास्थ्य केंद्र में मौजूद डॉक्टर की जिम्मेदारी होती है कि वह मरीज ना होने के बाद भी समय पर मौजूद रहे। वहां पर ड्यूटी डॉक्टर सालिक जमाल की थी लेकिन वह वहां से गायब थे। गर्भवती महिला स्वास्थ्य केंद्र में पहुंची तो उसको खून की जरूरत पड़ी उसका ब्लड ग्रुप बी नेगेटिव था। इसके चलते एसडीओ ने अपना रक्तदान दिया।

जब इस बात की खबर मौजूदा प्रमुख नवीन यादव को पड़ी तो वह मृतक के घर पर पहुंचे और भाजपा नेता मुन्ना सिंह के साथ अस्पताल भी गए। अस्पताल में पहुंचकर आरोपी डॉक्टर के ऊपर कार्यवाही की मांग की और लोगों के साथ मिलकर जमकर हंगामा किया। सबने मिलकर पूरी व्यवस्था को दोषी ठहराया, लेकिन इस पूरे मामले में अभी तक कोई सुधार नहीं किया गया है और दोषियों पर कार्रवाई करने की मांग उठाई है। जैसे ही यह खबर धीरे-धीरे आसपास के माहौल में फैली तो स्वास्थ्य से जुड़े विभागों में कार्य कर रहे अधिकारी एक-एक कर घटनास्थल पर पहुंचने लगे और जिन डॉक्टरों की ड्यूटी उस वक्त थी उन सभी से बातचीत की। स्वास्थ्य केंद्र में जमकर सवाल जवाब हुआ।

बता दें कि गांव से स्वास्थ्य केंद्र का रास्ता 8 किलोमीटर की दूरी पर है, जिसको आदिवासी एवं हरिजन परिवार के लोग पैदल ही तय करते हैं। बिजली और पानी की सुविधा ना के बराबर है ऐसे में मूल सुविधाएं देने के लिए लोगों ने गुहार लगाई है और एसडीएम धीरेंद्र कुमार द्वारा सख्त आदेश दिया है कि गांव में जल्द से जल्द पानी पीने की सुविधा और सड़क निर्माण एवं अन्य जरूरी व्यवस्थाएं जो लोगों के लिए आवश्यक है, उनको बहाल किया जाए और अगर आने वाले समय में कोई भी लापरवाही बरतना है तो उसको कानूनी कार्यवाही के तहत सजा दी जाए।

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