लालू के करीबी रहे इस बड़े नेता का 74 की उम्र में दिल्ली एम्स में निधन !

लालू के करीबी रहे इस बड़े नेता का 74 की उम्र में दिल्ली एम्स में निधन

डेस्क : आज की सबसे बड़ी उठा – पटक राजनीति के गलियारों में हो चुकी है। ऐसी अंधी चली की राजद नेता और लालू प्रसाद के सबसे करीबी रघुवंश प्रसाद सिंह (74) का आज निधन हो गया। वो हमारे बीच से यूँ चले गए जिसकी किसी को उम्मीद भी न थी । आज उन्होंने दिल्ली के एम्स में अंतिम सांस ली। वे पिछले चार दिनों से सांस की तकलीफ से जूझ रहे थे। उन्हें आईसीयू में भर्ती कराया गया था।

बताते चले रघुवंश जब पटना एम्स में भर्ती थे, तब उन्होंने 23 जून को पार्टी उपाध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया था। वे रामा सिंह के राजद में आने की खबरों को लेकर नाराज चल रहे थे। रघुवंश को 18 जून को कोरोना हो गया था। एक जुलाई को उन्हें पटना एम्स से छुट्टी मिल गई थी। इसके बाद बीतें 10 सितंबर को उन्होंने अस्पताल के बेड से ही राजद प्रमुख लालू यादव को इस्तीफा भेजा था। अपने इस्तीफे में उन्होंने लिखा था कि, ‘‘जन नायक कर्पूरी ठाकुर के निधन के बाद 32 साल तक आपके पीठ पीछे खड़ा रहा, लेकिन अब नहीं। पार्टी, नेता, कार्यकर्ता और आमजन का बड़ा स्नेह मिला, मुझे क्षमा करें।’’

लालू प्रसाद यादव रांची की बिरसा मुंडा जेल में हैं। अपने करीबी की नाराजगी की बात पर उन्होंने खुद मोर्चा संभाला। रघुवंश को चिट्ठी लिखी, ‘‘राजद परिवार आपको शीघ्र स्वस्थ होकर अपने बीच देखना चाहता है। चार दशकों में हमने हर राजनीतिक सामाजिक और यहां तक कि पारिवारिक मामलों में भी मिल बैठकर ही विचार किया है। आप जरूर स्वस्थ हों फिर बैठ के बात करेंगे। आप कहीं नहीं जा रहे हैं! समझ लीजिए।’’

लालू की चिट्ठी का भी रघुवंश ने जवाब दिया। उन्होंने लिखा, ‘‘वर्तमान में राजनीति में इतनी गिरावट आ गई है, जिससे लोकतंत्र पर खतरा है। कुछ पार्टियों द्वारा सीटों, टिकट की खरीद-बिक्री से कार्यकर्ताओं की हकमारी हो रही है। वोट का राज और वोट प्रणाली ही चौपट जाए तो लोकतंत्र कैसे बचेगा। महात्मा गांधी, बाबू जयप्रकाश नारायण, डॉ. लोहिया, बाबा साहब और जननायक कर्पूरी ठाकुर के नाम और विचारधारा पर लाखों लोग रहे, कठिनाइयां सहीं, लेकिन डगमग नहीं हुए। समाजवाद की जगह सामंतवाद-जातिवाद, वंशवाद, परिवारवाद, संप्रदायवाद आ गया। पांचों महान शख्सियतों की जगह एक ही परिवार के पांच लोगों (लालू, राबड़ी, तेज प्रताप, तेजस्वी और मीसा) का छपने लगा। लोग पद इसलिए चाहते हैं कि धन कमा सकें।’’

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