Bihar का यह ‘शूगर फ्री’ आम सुर्ख़ियों में, पकने पर 16 बार बदलता है रंग, जानें – इसकी कीमत

डेस्क : इन दिनों फलों के राजा कहे जाने वाले आम का समय चल रहा है। तरह-तरह की वैराइटी वाले आमों का स्वाद इसे पसंद करने वाले लोग रह रहे हैं। राजधानी पटना में तो आप मेला तक लगा दिया गया है ।जहां आकर लोग तरह-तरह की प्रजातियों के आमों की जानकारी ले रहे हैं। ज्ञान भवन में लगे आम मेले का आनंद लोग जमकर ले रहे हैं। इस महोत्सव में मालदा ,लंगड़ा, सीपिया, बीजू, सुकुल, रत्नागिरी एवं अन्य कई तरह के आम की प्रजातियां रखी गई है। इस आम मेले के अलावा भी खास प्रजाति का आम बिहार में आजकल काफी प्रसिद्धि पा रहा है। हालांकि यह आम इस मेले में अब तक मौजूद नहीं है।

मुजफ्फरपुर में ख़ास तरह के आम की हो रही बागवानी : मुजफ्फरपुर के किसान भूषण सिंह ने अपने आम के बगीचे में खास प्रजाति का आम लगा रखा है जो अन्य सामान आमों से काफी अलग है। इस आम का साइज, शेप, रंग, नॉर्मल मिलने वाले आम से बिल्कुल अलग है। इसे फलाने वाले भूषण सिंह दावा करते हैं कि उनका आम अन्य आम से बिल्कुल ही भिन्न है। इस शुगर फ्री आम को अमेरिकन ब्यूटी का नाम दिया गया है। यह आम इतना अलग है कि इसके आसपास से गुजरने वाले सभी व्यक्ति रुक कर थोड़ी देर इसे जरूर देखते हैं। यह आम फलने से लेकर पकने तक में 16 बार अपने रंग बदलता है। पकने के बाद इस का वजन लगभग 500 ग्राम या इससे थोड़ा अधिक रहता है।

शुगर के रोगियों के लिए काफी सही रहने वाला है यह आम : भूषण सिंह मुजफ्फरपुर के मुसहरी गांव के रहने वाले हैं। इन्होंने इस आम के पौधे को 6 वर्ष पूर्व अपने बगीचे में पश्चिम बंगाल से लाकर लगाया था। पूर्व के दो साल से यह फलना शुरू हो गया था लेकिन कम फल होने की वजह से इसकी चर्चा नहीं हो रही थी। इस साल अधिक मात्रा में फलने की वजह से यह आम काफी चर्चा का विषय बना हुआ है। इस में मिठास काफी कम होता है। इस वजह से यह डायबिटीज रोगियों के लिए काफी सही रहेगा। इस को पकने से लेकर तैयार होने तक में पांच महीने तक का वक्त लग जाता है।

अगले वर्ष से ज्यादा की मात्रा में इसके बाग़वानी होने की उम्मीद : इस वर्ष यह आम ज्यादा फलने की वजह से चर्चा का विषय बना हुआ है। इसके नए पौधे की डिमांड भी काफी बढ़ गई है। लेकिन यह अब तक बिहार की किसी नर्सरी में उपलब्ध नहीं है। लेकिन इसे ज्यादा स्तर पर तैयार करने की कवायद भी शुरू हो गई है। कृषि विश्वविद्यालय समस्तीपुर और राष्ट्रीय लीची अनुसंधान केंद्र मुजफ्फरपुर के वैज्ञानिकों ने इसे जांचने परखने के बाद इसका स्वाद भी लिया है। और जल्द ही उम्मीद है कि इसके और पौधों को तैयार करके ज्यादा मात्रा में इस आम की अगले वर्ष से बागवानी की जाएगी।

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