घर का खर्च चलाने के लिए आम आदमी को करनी पड़ेगी जेब ढ़ीली- जानिए कैसे ?

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price hike

डेस्क : अब रोजमर्रा की इस्तेमाल होने वाली चीजों के लिए उपभोक्ताओं को अपनी जेब ढीली करने पड़ सकते हैं। गेंहू, पाम तेल और पैकेजिंग समान आदी कैसी चीजों के दाम में उछाल के चलते एफएमसीजी कंपनियां अपने उत्पादों की कीमत में बढ़ोतरी करने की तैयारी में लगी है।

यूक्रेन से भी एफएमसीजी कंपनियों कोझटका लगा है। उनका ऐसा मानना है कि इसके चलते गेहूं कच्चे तेल, खाद्य तेल आदि की कीमतों में उछाल आएगा। डाबर और पारले जैसी कंपनियों की स्थिति पर नजर है और वे मुद्रास्फीति दबाव से निपटारे के लिए सोच विचार कर कदम बढ़ाएगी। वही हिंदुस्तान यूनिलीवर और नेस्ले जैसे कंपनियों ने अपने खाद्य उत्पादों के दाम पिछले सप्ताह बढ़ा दिए।

पारले प्रोडक्ट के वरिष्ठ श्रेणी प्रमुख मयंक शाह ने कहा कि उद्योग द्वारा 10 से 15% की कीमत में वृद्धि की उम्मीद की जा रही है। उन्होंने कहा कि कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव है। ऐसे में अभी यह कहना मुश्किल है कि कीमत में कितनी वृद्धि हो सकती है। उन्होंने कहा कि तेल का दाम ₹180 लीटर तक पहुंच गया था और अब यह ₹150 लेकर पर आ गया है। वहीं कच्चे तेल का दाम $140 प्रति बैरल पर जाने के बाद $100 से नीचे आ चुका है।

आगे उन्होंने कहा कि हालांकि कीमतें अब भी पहले की तुलना में अधिक है। एडलवाइज फाइनेंशियल सर्विसेज गेम कार्यकारी उपाध्यक्ष अवनीश राय के मुताबिक, एफएमसीजी कंपनियां मुद्रास्फीति का बोझ उपभोक्ताओं पर डाल रही है। हमारा अनुमान है की सभी एफएमसीजी कंपनियां साल 2022 और 2023 की पहली तिमाही में कीमतों में 3 – 5% तक की वृद्धि करेंगी।

डाबर इंडिया के मुख्य वित्त अधिकारी अंकुश जैन के अनुसार मुद्रा स्थिति लगातार ऊंची बनी हुई है और यह दूसरे साल चिंता का विषय है। मुद्रास्फीति दबाव की वजह से उपभोक्ताओं ने अपना खर्च कम कर दिया है। वह छोटे-छोटे पैक खरीद रहे हैं। स्थिति पर हमारी नजर है और सोच विचार के बाद मुद्रास्फीति दबाव से बचाव के उपाय किए जायेंगे। मयंक शाह ने कहा कि पिछली बार एफएमसीजी कंपनियों ने पूरी तरह से जिंस कीमतों में वृद्धि का बोझ ग्राहकों के ऊपर नहीं डाला था। अब 10 से 15% की वृद्धि की सभी बात कर रहे हैं। हालांकि उत्पादन की लागत कहीं अधिक बढ़ी है और कीमतों में बढ़ोतरी का फैसला एक या दो माह में ले लिया जाएगा।