केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर बने टेरिटोरिअल आर्मी कैप्टेन, माँ भारती का फर्ज निभाने के लिए रहेंगे सबसे आगे

Anurag Thakur Become Territorial army captain

डेस्क : केंद्रीय राज्य वित्त मंत्री अनुराग ठाकुर को 2016 में टेरिटोरिअल आर्मी का लेफ्टिनेंट बनाया गया था। लेकिन, अब उनका पद बढ़ गया है और वह सेना के टेरिटोरियल आर्मी के कैप्टन बना दिए गए हैं। बता दें कि उन्होंने इसकी तस्वीर और वीडियो को सोशल मीडिया पर शेयर किया और कहा कि वह इस वक्त गर्वान्वित हो रहे हैं।

ज्यादा जानकारी के लिए बता दें कि अनुराग ठाकुर पहले मंत्री हैं जो प्रादेशिक सेना में नियमित कमीशन के अधिकारी बन गए हैं। इस बात का जिक्र उन्होंने अपने सोशल मीडिया हैंडल के कैप्शन में भी किया और कहा की वह भारत माता की सेवा करने के लिए हमेशा अपना योगदान तैयार हैं। भारतीय सेना में उनको प्रमोट कर दिया गया है और अब वह लेफ्टिनेंट कैप्टन बन गए हैं। उन्होंने ट्विटर पर लिखा की वह मां भारती की सेवा करने के लिए प्रतिबद्ध है और हमेशा योगदान देने के लिए आगे खड़े रहेंगे।

भारतीय प्रादेशिक सेना यानी की भारतीय टेरिटोरियल आर्मी नियमित भारतीय सेना के बाद रक्षा की दूसरी पंक्ति है; यह कोई पेशा, व्यवसाय या रोजगार का स्रोत नहीं है। यह केवल उन लोगों के लिए है जो पहले से ही मुख्य नागरिक व्यवसायों में हैं, इसको हम एक शर्त के तौर पर भी देख सकते हैं। भारतीय टेरिटोरियल आर्मी के स्वयंसेवक आमतौर पर हर साल 2 से 3 महीने के लिए वर्दी में काम करते दिखतें हैं ऐसा वह इसलिए करते हैं ताकि वे सख्त जरूरत या राष्ट्रीय आपात स्थिति के दौरान राष्ट्रीय रक्षा के लिए हथियार उठा सकें। आधुनिक प्रादेशिक सेना का उद्घाटन भारत के पहले भारतीय गवर्नर-जनरल सी। राजगोपालाचारी ने शुरू की थी। यह व्यवस्था 9 अक्टूबर 1949 को 1948 में स्वतंत्रता प्रादेशिक सेना अधिनियम पारित होने के बाद इसको लाया गया।

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