जनता की परेशानी बढ़ी लोकतंत्र के महापर्व के लिए गाड़ियों की धरपकड़ शुरू…

जनता की परेशानी बढ़ी लोकतंत्र के महापर्व के लिए गाड़ियों की धरपकड़ शुरू…

डेस्क : बिहार में विधानसभा चुनाव के लिए हरेक विधानसभा क्षेत्र के लिए कम से कम 550 गाड़ियों की जरूरत होगी। हालांकि यह शुरुवाती आकलन है, क्यूंकि मतदान केंद्रों की संख्या व सुरक्षा कर्मियों को लाने-ले जाने के दौरान सोशल डिस्टेंसिंग का पालन कराने की अनिवार्यता के कारण गाड़ियों की मांग और बढ़ सकती है। इसके मद्देनज़र गाड़ियों की जब्ती अभी से ही शुरू हो गई है। इसका सीधा असर आम जनजीवन पर होगा। खासकर सार्वजनिक परिवहन सेवा से सफर करने वालों को एक से दूसरे स्थान पर जाने में परेशानी होनी तय है।

चुनावी कार्य के लिए परिवहन विभाग ने जिलों से गाड़ियों की मांग की थी। जिलों ने प्रारम्भिक आकलन के तहत हरेक विधानसभा क्षेत्र के लिए कम से कम 550 गाड़ियों की मांग की है। इस हिसाब से एक लाख 33 हजार गाड़ियों की जरूरत है। लेकिन कुछ बड़े विधानसभा क्षेत्र या जलजमाव वाले इलाकों में गाड़ियों की और जरूरत हो सकती है। इसे देखते हुए विभाग ने एक लाख 56 हजार गाड़ियों की जरूरत का आकलन किया है। 11525 बस, 6593 ट्रक, 38871 मध्यम वाहन, 99832 छोटी गाड़ियां की जरुरत है यानि की कुल मिलाकर 156821 गाड़ियां चाहिए चुनाव में ।

पटना, नालंदा के अलावा राज्य के कुल 10 जिले ऐसे हैं जहां दो चरणों में मतदान होने हैं। ऐसे में इन जिलों में अगर एक बार गाड़ी की जब्ती हुई तो उसका उपयोग चुनाव समाप्त होने तक किया जाएगा। स्कूली बस के अलावा ऑटो, बस, बाइक आदि की जब्ती शुरू होने से लोगों को परेशानी होनी तय है। खासकर सार्वजनिक परिवहन सेवाओं से सफर करने वाले लोगों पर इसका सीधा असर होगा। अब चूंकि 15 अक्टूबर से सामाजिक, शैक्षणिक, धार्मिक सहित अन्य गतिविधियां शुरू होने जा रही है। ऐसे में सार्वजनिक परिवहन सेवाओं की अधिक जरूरत होगी। लेकिन चुनावी कार्य के कारण गाड़ियों की हो रही जब्ती से लोगों को परेशानी होनी तय है।

साथ ही, अब तक के चुनाव की तुलना में इस बार सबसे अधिक सुरक्षा कर्मी की ड्यूटी ली जा रही है। कोरोना के कारण सोशल डिस्टेंसिंग की अनिवार्यता के कारण गाड़ियों की मांग और बढ़ सकती है।हालांकि चुनाव आयोग ने जिला प्रशासन को आदेश दिया है कि वह मतदान की तिथि के चार दिन पहले गाड़ियों की धरपकड़ करे। लेकिन मतदान तिथि की कौन कहे, जिला प्रशासन ने नामांकन प्रक्रिया शुरू होने के दौरान ही गाड़ियों की जब्ती शुरू कर दी है। प्रशासन के अधिकारियों का तर्क है कि अगर अभी से गाड़ियों की जब्ती शुरू नहीं हुई तो फिर आने वाले दिनों में और परेशानी हो सकती है। चूंकि पर्व-त्योहार का समय है। अगर गाड़ियों की जब्ती हो भी जाए तो ड्राइवर को खोजने में परेशानी होगी। इसलिए प्रशासन ने अभी से ही गाड़ियों की जब्ती शुरू कर दी है। इसकी शुरुआत स्कूली बस से की गई है।

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