जहांगीर ने अपनी माशूका नूर जहाँ को पाने के लिए उसके पति शेर अफ़गान को इस अनैतिक तरीके से हटाया रस्ते से – बात जानकार रूह काँप जाएगी आपकी

डेस्क : मुगल सम्राट जहांगीर और नूरजहां के कई किस्से प्रचलित हैं। इनमें से एक किस्सा जहांगीर और नूरजहां की शादी का भी है। दरअसल, कहा जाता है कि जहांगीर ने नूरजहां को पाने के लिए अपने सिपहसालार को मरवा दिया था। जहांगीर ने इस रणनीति के बाद ही नूरजहां को हासिल किया था। आपने नूरजहां की खुबसूरती के बारे में तो बहुत सुना होगा, लेकिन क्या आपको पता हैं कि आखिर नूरजहां थीं कौन और किस तरह से मुगल शासक जहांगीर के साथ उसकी शादी हुई थी।

पहले तो आपको ये बता दें कि नूरजहां किसी का नाम नहीं है, नूरजहां एक नाम के बदले एक उपाधि है। नूरजहां का असली नाम मेहरून्निसा था। उसके पिता का नाम गयास बेग और मां का नाम असमतबेग था। ये तेहरान के रहने वाले थे। फिर वे भारत की तरफ आए और फिर 1577 में वे कंदहार पहुंचे तो उनकी एक बेटी हुई, जिसका नाम मेहरून्निसा रखा गया। इसके बाद गयासबेग ने मुगल दरबार में नौकरी शुरू कर दी। इसके बाद वे दीवान बने और बाद में जहांगीर ने गयासबेग को एतमाद-उद-दौला की पदवी से सम्मानित किया गया।

दरअसल, शहजादा सलीम उसके रूप और सौंदर्य पर विमुग्ध हो गया। उसने उससे शादी करने की इच्छा जताई, लेकिन कहा जाता है कि इस रिश्ते से अकबर खुश नहीं थे। अकबर ने फिर मेहरून्निसा की शादी 1594 में अलीकुली खां नाम के एक ईरानी प्रवासी से कर दी। अलीकुली खां को शेर का शिकार करने में में महारत हासिल थी और उसे दराबर में शेर अफगान की उपाधि दी गई। दरबार का वह अहम सदस्य बन गया।

हालांकि, विद्रोही अफगानों के खिलाफ़ कोई कार्रवाई नही करने की वजह से उसे लेकर अविश्वास बढ़ने लगा। तब जहांगीर को खबर मिली कि वो कर्तव्य विमुख हो रहा है। फिर दराबर में शेर अफगान को बुलाया गया, लेकिन आने में उसने देरी कर दी। इससे बंगाल के सुबेदार रहे कुतुबद्दीन ने यह समझा कि शाही आदेश की वह अवहेलना कर रहा है। इसके बाद जब वहां शेर अफगान आया तो कुतुबद्दीन ने उसे कैद करने की कोशिश की। जिसके बाद शेर अफगान ने कुतुबद्दीन पर हमला किया। फिर शेर अफगान को अन्य सैनिकों ने मार दिया। जहांगीर ने शेर अफगान के मरने के बाद अपनी इच्छा जाहिर की और नूरजहां को अपनाया।

कहा जाता है कि नूरजहां के लिए जहांगीर ने शेर अफगान को मरवाया था। वहीं, नूरजहां की उपाधि जहांगीर ने ही मेहरून्निसा को दी थी। वहीं कई इतिहासकारों ने नूरजहां को जिम्मेदार बताया है तो वहीं कुछ का कहना है कि इतिहास को लेकर लिखी गई कई अन्य किताबों में इसका कोई जिक्र नहीं मिलता है। कई इतिहासकारों ने तो ऐसा भी बताया है कि कभी अकबर ने जहांगीर को पहले ही शादी के लिए मना नहीं किया था। मगर यह साफ़ तौर पर नहीं कहा जा सकता है कि नूरजहां से शादी के लिए शेर अफगान को जहांगीर ने मरवाया था।

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