न बिजली-न डीज़ल, अब हाइड्रोजन सेल से दौड़ेगी भारतीय रेल – चंद मिनटों में पूरा होगा कई किलोमीटर लंबा सफर

डेस्क : भारत सरकार का अब पूरा ध्यान हाइड्रोजन से इंधन पैदा करने पर है, बता दें कि हाईड्रोजन से इंधन पैदा करने पर भारत सरकार नई तकनीकों को विकसित करने में लगी हुई है। भारत के वरिष्ठ साइंटिस्ट का मानना है की यदि भारत हाइड्रोजन से इंजन बनाने में सक्षम हो जाता है तो कम से कम कार्बन उत्सर्जन होगा। यूनाइटेड नेशन के सुझाए गए रास्ते पर चलने में जीरो कार्बन उत्सर्जन करना कई विकासशील देशों का लक्ष्य है। ऐसे में इस लक्ष्य की ओर भारत बढ़ रहा है।

रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि भारत एक ऐतिहासिक पहल करने जा रहा है। यदि भारत हाइड्रोजन सेल से इंधन बनाने में कामयाब हो जाता है और उसको रेल में शुरू कर देता है, तो पूरी दुनिया में भारत तीसरे नंबर पर आएगा। इससे पहले जर्मनी और पोलैंड यह काम कर चुके हैं। फिलहाल भारत में ग्रीन एनर्जी का प्रयोग शुरू कर दिया गया है। ट्रेन में हाइड्रोजन फ्यूल सेल लगाया जाएगा। हरियाणा के सोनीपत-जींद में 89 किलोमीटर लंबे डेमू ट्रेन के रूट पर जगह-जगह से निविदाएं आमंत्रित की गई है। यह निविदाएं 21 सितंबर से 5 अक्टूबर के बीच भरी जाएंगी।

यदि हाइड्रोजन सेल काम कर जाते हैं तो सालाना ढाई करोड़ रुपए की बचत होगी। साथ ही साथ 11 किलो टन नाइट्रोजन उत्सर्जन बंद हो जाएगा और 0.72 किलो टन कार्बन निकलना खत्म हो जाएगा। हाइड्रोजन फ्यूल सेल में सौर ऊर्जा की मदद से पानी को विघटित किया जाता है ऐसे में जब पानी विघटित हो जाता है तो हाइड्रोजन गैस के साथ कुछ एनर्जी निकलती है, जिसकी मदद से बड़े स्तर पर ऊर्जा प्राप्त होती है। ऐसे में यदि यह ट्रायल सफल हो जाता है तो हाइड्रोजन फ्यूल सेल की दिशा में भारत क्रांति करेगा।

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