कैमूर के जंगलों में टहलते दिखे बाघ, निवासी बोले 50 सालों से यहीं रहते हैं – इलाके को किया जाएगा टाइगर रिज़र्व घोषित

डेस्क : बिहार में स्थित कैमूर पहाड़ी के आस पास टाइगर देखे गए हैं। जल्द इस क्षेत्र को टाइगर रिज़र्व घोषित किया जाएगा। ऐसे में अब बिहार से लेकर मध्य प्रदेश तक टाइगर रिज़र्व बनकर तैयार होगा। टाइगर कोर्रिडोर को आश्रयणी तक बनाया जाएगा। इस जगह को मुख्य तौर पर टाइगर रिज़र्व बनाने के लिए एक निश्चित फण्ड भी तैयार किया गया है। रोहतास, तिलौथू, औरैया व भुड़कुड़ा पहाड़ी पर बाघ होने के प्रमाण मिले हैं। वन अधिकारियों ने कहा है की यहाँ पर रोज बाघ आना जाना करते हैं, यह जानकारी राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (एनटीसीए) को दे दी गई है।

आस पास के इलाकों में बड़े बूढ़ों का कहना है की यहां पर बाघों की मौजूदगी बीते 50 सालों से हैं। 1975 में यहाँ इतने ज्यादा बाघ थे की लोग रह नहीं सकते थे। लंबे समय से यहां पर जंगल माफिया आ गए थे और हाईवे एवं अन्य निर्माण कार्य होने लगे थे। जिसके चलते इंसान जंगल काटने लग गए थे। इस वजह से बाघों का आना जाना कम हो गया था। ऐसे में अब सरकार के कड़े रवैये और टाइट सिक्योरिटी के चलते वन विभाग के आसपास के इलाकों में फिर से बाघ दिखने लगे हैं। यहां पर घूमते हुए बाघों के पंजों के निशान प्राप्त हुए हैं। पंजे के निशान की फॉरेंसिक अधिकारियों ने जांच की और पाया कि यह बाघों के पंजों के ही निशान है। वही बाघ द्वारा छोड़े गए मल की भी टेस्टिंग की गई। मल की टेस्टिंग के बाद पता चला है कि यहां पर मौजूद बाग का डीएनए देहरादून के बाघ के डीएनए से मिलता है।

यह रास्ता झारखंड के बेतला टाइगर रिजर्व से होते हुए मध्य प्रदेश के दो टाइगर रिजर्व से गुजरता है। ऐसे में यदि इस इलाके को टाइगर रिजर्व घोषित कर दिया जाए तो बाघों के आने जाने के लिए सुरक्षित जगह बन जाएगी। वन अधिकारियों ने जंगल के कई इलाकों में खड्डे तैयार किए हैं ताकि वह बाघों को पानी पीने में सहायता कर सकें। इस वन्य क्षेत्र के रोहतास,चेनारी, तिलौथू, भुड़कुड़ा व औरैया पहाड़ी पर भी बाघ के पद चिह्न व उनकी आवाजाही देखी गई है। बाघों की तस्वीर भी सभी प्रकार के रस्ते में लगे हुए आटोमेटिक कैमरों ने खींची है।

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